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    Shani Jayanti 2025: कब और क्यों मनाई जाती है शनि जयंती? यहां जानें शुभ मुहूर्त एवं धार्मिक महत्व

    ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव (Shani Jayanti 2025) को न्याय के देवता और कर्मफल दाता कहा जाता है। शनिदेव की कुदृष्टि पड़ने पर जातक को जीवन में नाना प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही आर्थिक संकटों से भी गुजरना पड़ता है। हर शनिवार के दिन न्याय के देवता शनिदेव की भक्ति भाव से पूजा की जाती है।

    By Pravin KumarEdited By: Pravin KumarUpdated: Thu, 17 Apr 2025 05:09 PM (IST)
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    Shani Jayanti 2025: शनिदेव को कैसे प्रसन्न करें?

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Shani Jayanti 2025: सनातन धर्म में शनि जयंती का खास महत्व है। यह पर्व न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित है। इस शुभ अवसर पर कर्मफल दाता शनिदेव की पूजा की जाती है। साथ ही मनचाहा वरदान पाने के लिए साधक व्रत भी रखते हैं। शनिदेव की पूजा करने से जातक को जीवन में मनमुताबिक सफलता मिलती है। साथ ही सभी प्रकार के दुख एवं संकट दूर हो जाते हैं।

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    ज्योतिषियों की मानें तो देवों के देव महादेव की पूजा एवं भक्ति करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। इसके लिए सोमवार और शनिवार के दिन भगवान शिव की पूजा करें। साथ ही पूजा के समय सुविधा अनुसार सामान्य जल, गंगाजल और दूध से भगवान शिव का अभिषेक करें। लेकिन क्या आपको पता है कि शनि जयंती कब और क्यों मनाई जाती है। आइए, शनि जयंती की सही डेट (Shani Jayanti 2025 Kab Hai), शुभ मुहूर्त एवं योग जानते हैं-

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    कब मनाई जाती है शनि जयंती?

    हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर शनि जयंती मनाई जाती है। सनातन शास्त्रों में निहित है कि ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर सूर्य देव के पुत्र शनिदेव का जन्म हुआ है। इसके लिए हर साल ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि जयंती मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर मंदिरों में शनिदेव की विशेष पूजा की जाती है। इस साल 27 मई को शनि जयंती मनाई जाएगी।

    शनि जयंती शुभ मुहूर्त (Shani Jayanti Shubh Muhurat)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, 26 मई को दोपहर 12 बजकर 11 मिनट पर ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि शुरू होगी। वहीं,  27 मई को सुबह 08 बजकर 31 मिनट पर ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि समाप्त होगी। 

    शनि जयंती शुभ योग (Shani Jayanti Shubh Yoga)

    ज्येष्ठ अमावस्या तिथि पर सुकर्मा योग रात 10 बजकर 54 मिनट तक है। साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 05 बजकर 25 मिनट से लेकर 05 बजकर 32 मिनट तक है। इसके अलावा, शिववास योग भी बन रहा है। शिववास के दौरान भगवान सुबह 08 बजकर 31 मिनट तक कैलाश पर मां गौरी के साथ रहेंगे।

    पंचांग

    • सूर्योदय - सुबह 05 बजकर 23 मिनट पर
    • सूर्यास्त - शाम 07 बजकर 12 मिनट पर
    • चंद्रास्त- शाम 07 बजकर 49 मिनट पर
    • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 03 मिनट से 04 बजकर 44 मिनट तक
    • विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 36 मिनट से 03 बजकर 31 मिनट तक
    • गोधूलि मुहूर्त - शाम 07 बजकर 11 मिनट से 07 बजकर 31 मिनट तक
    • निशिता मुहूर्त - रात्रि 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।