Shani Dev Katha: शनिदेव को अपनी पत्नी से मिला था ये श्राप, जिस कारण भक्त नहीं मिलाते नजर
शनि देव (Shani Dev) व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार दंड या फिर पुण्य फल देते हैं इसलिए उन्हें कर्मफलदाता कहा जाते है। इसी के साथ आपने देखा होगा कि शनिदेव की मूर्तियों या चित्र में उनकी नजरे हमेशा नीची रहती हैं जिसके पीछे एक पौराणिक कथा मिलती है। चलिए जानते हैं इस कथा के बारे में।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शनिदेव कर्म और न्याय के शासक हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, शनिदेव से कभी भी नजरें नहीं मिलाई जाती हैं। ऐसा करने व्यक्ति को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल इसके पीछे एक कथा मिलती है, जिसके अनुसार, शनिदेव को यह श्राप उनकी पत्नी से मिला था। चलिए जानते हैं शनिदेव से नजरें न मिला पाने की मान्यता के पीछे की कहानी।
क्रोध में आकर पत्नी ने दिया श्राप
ब्रह्म पुराण की कथा के अनुसार, एक बार शनिदेव भक्ति में लीन थे, तभी संतान प्राप्ति की इच्छा लिए उनकी पत्नी चित्ररथ वहां आईं। लेकिन शनिदेव भक्ति में इतने लीन थे कि उन्होंने अपनी पत्नी की बात पर ध्यान ही नहीं दिया। इसपर चित्ररथ ने बहुत देर तक प्रतीक्षा की, लेकिन इसके बाद भी शनि देव का ध्यान भंग नहीं हुआ। इससे चित्ररथ को बहुत क्रोध आया और गुस्से में शनिदेव को यह श्राप दे दिया कि आप जिस पर भी अपनी दृष्टि डालेंगे उसका अनिष्ट होगा।
इसलिए कही जाती है वक्र दृष्टि
शनिदेव का ध्यान टूटने पर उन्हें अपनी गलती पर पछतावा हुआ और उन्हें अपनी पत्नी से क्षमायाचना भी की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। एक बार दिया गया श्राप वापस नहीं हो सकता था, इसलिए तभी से शनिदेव अपनी नजर हमेशा नीचे ही रखते हैं, ताकि उनकी दृष्टि किसी व्यक्ति पर न पड़े और वह अनिष्ट होने से बचा रहे। यही कारण है कि शनिदेव की दृष्टि को वक्र दृष्टि कहा जाता है। इसी के साथ शनिदेव के ठीक सामने एकदम सीधे खड़े होने से भी मनाही होती है।
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किस तरह पाएं शनिदेव का आशीर्वाद
शनिदेव की कृपा प्राप्ति का सबसे आसान तरीका यही है कि आप अपने कर्म अच्छे रखें। इसी के साथ शनिवार का दिन शनिदेव की (Shani Effects) की कृपा प्राप्ति के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इस दिन पर आप शनि मंदिर जाकर शनिदेव की उपासना करें और उसके समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
इसी के साथ शनिवार के दिन हनुमान जी की आराधना करने से भी व्यक्ति शनि की बाधा से बचा रह सकता है। अधिक लाभ प्राप्ति के लिए आप शनिवार के दिन पीपल के पेड़ में जल अर्पित करके पेड़ के समक्ष सरसों के तेल का दीपक भी जला सकते हैं।
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