Sati Anusuiya Katha: अपने सतीत्व के प्रताप से अनुसुइया ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश को बना दिया था बालक
ऋषि अत्रि की पत्नी अनुसुइया पांच पतिव्रता नारियों में गिनी जाती हैं। अन्य पतिव्रता नारी द्रौपदी सुलक्षणा सावित्री और मंदोदरी हैं। अनुसुइया का वर्णन रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों में भी मिलता है। आज हम आपको अनुसुइया की एक ऐसी दिव्य कथा बताने जा रहे हैं जिसमें उन्होंने ब्रह्मा विष्णु और महेश को अपने सतीत्व के प्रताप से बालक बना दिया था।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धार्मिक ग्रंथों में कई पौराणिक कथाएं मिलती हैं, जो हैरान करने के साथ-साथ कुछ-न-कुछ संकेत भी देती हैं। ऐसी ही एक कथा माता अनुसुइया (Anusuiya katha) से भी जुड़ी हुई है, जो उनके सतीत्व के प्रताप को बताती है। तो चलिए जानते हैं वह दिव्य कथा।
नारद जी ने किया गुणगान
पौराणिक कथा के अनुसार, माता अनुसुइया अपने सतीत्व को लेकर काफी विख्यात थीं। एक बार नारद जी लक्ष्मी सरस्वती और पार्वती जी के पास पहुंचे और उन तीनों के सामने पतिव्रता अनुसुइया का गुणगान करने लगे। यह सुनकर तीनों देवियों के मन में अनुसूइया के प्रति ईर्ष्या पैदा हो गई। तब उन तीनों ने अनुसुइया की परीक्षा लेने के लिए अपने पतियों यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश से कहा। बहुत जिद करने के बाद वह तीनों अनुसुइया की परीक्षा लेने के लिए मान गए।
त्रिदेव ने रखी ये शर्त
एक बार जब ऋषि अत्रि आश्रम से बाहर गए थे, तब वह तीनों भिक्षुक के भेष में अनुसुइया के पास पहुंचे। अनुसुइया ने उन्हें सत्कार के लिए आमंत्रित किया, लेकिन उन्होंने अनुसुइया के सामने एक शर्त रख दी। जिसके अनुसार, जब वह बिना वस्त्र के उन तीनों का स्वकार करेंगी तभी वह उनकी भिक्षा स्वीकार करेंगे। तब माता अनुसुइया सोच में पड़ गई कि अब वह क्या करें। थोड़ी देर के बाद उन्होंने तीनों देवों से कहा जैसी आपकी इच्छा और यह कहते हुए उन्होंने तीनों पर जल छिड़ककर उन्हें 6-6 माह के बालक में बदल दिया।
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तीनों देवियों को सताने लगी चिंता
इसके बाद उन्होंने तीनों को बारी-बारी दूध पिलाया और इसके बाद उन्हें पालने में सुला दिया। तीनों बालकों को देखकर अनुसुइया का मातृत्व भाव झलकने लगा। जब पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती ने यह देखा कि तीनों लोगों के शासक बालक बन गए हैं, तो उन्हें चिंता सताने लगी। तब वह तीनों नारद जी के साथ अनुसुइया के पास पहुंची, और उनसे कहने लगी किं कृपया हमारे पतियों को हमें वापस सौंप दीजिए।
तब अनुसुइया कहती है कि अपने-अपने पतियों को पहचान कर ले जाओ। लेकिन तीनों अपने-अपने पति को पहचानने में असमर्थ थीं। तब वह अनुसूया से क्षमा याचना करती हैं और तीनों देवों को पुनः उसी रूप में लाने की प्रार्थना करने लगती हैं। तब अनुसुइया बालक रूपी त्रिदेवों पर जल छिड़ककर उन्हें पूर्व रूप प्रदान कर देती हैं।
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