विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सर्वपितृ अमावस्या पर कुतुप मुहूर्त में ही कराएं ब्राह्मण भोज, नोट करें शुभ समय और नियम

Published: Sun, 04 Oct 2026 11:53 AM (IST)

सर्वपितृ अमावस्या 2026 को पितरों की विदाई और श्राद्ध के लिए ब्राह्मण भोज के नियम और शुभ मुहूर्त जानें। इस ...और पढ़ें

सर्वपितृ अमावस्या पर होगी पितरों की विदाई (Picture Credit- AI Generated)

सर्वपितृ अमावस्या पर होगी पितरों की विदाई (Picture Credit- AI Generated)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आश्विन माह की अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या (Sarvapitru Amavasya 2026) और महालय अमावस्या कहा जाता है। इस दिन पितरों की विदाई होती है। सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि याद नहीं होती या फिर किसी कारण से पितृ पक्ष में हम उनका श्राद्ध नहीं कर पाते हैं।

सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों की आत्मा की शांति और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ब्राह्मण भोज से पितरों की आत्मा पूर्ण रूप से तृप्त होती है और पूर्वज प्रसन्न होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष शुरू होने पर पितर धरती पर आते हैं और सर्वपितृ अमावस्या के दिन अपने परिवार से विदा लेते हैं।

इसलिए सर्वपितृ अमावस्या के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है। ब्राह्मणों को भोजन करवाते समय नियमों का पालन करना जरूरी होता है। ऐसा न करने से शुभ फल की प्राप्ति नहीं होती है। आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं ब्राह्मण भोज के नियम, क्या खिलाएं और क्या नहीं।

ब्राह्मण को भोजन कराने के नियम

  • सर्वपितृ अमावस्या के दिन सुबह स्नान करने के बाद ब्राह्मण को घर बुलाएं।
  • इसके बाद उन्हें आसन पर बैठाएं। एक बात का विशेष ध्यान रखें कि ब्राह्मण का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए। ये दोनों दिशाएं धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती हैं।
  • इसके बाद उन्हें श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं।
  • इस दौरान अपना मन शांत रखें और किसी पर क्रोध न करें।
  • आखिर में ब्राह्मण को धन और वस्त्र दान में दें तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

भोजन में क्या खिलाएं

अगर आप सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो इस दिन ब्राह्मण को दूध, चावल और चीनी से बनी खीर जरूर खिलाएं। इसके अलावा सात्विक सब्जी और पूरी को भोजन में शामिल करें। ब्राह्मण भोज के लिए ताजे फल और मिठाई को भी शामिल किया जा सकता है।

कब है सर्वपितृ अमावस्या 2026?

सर्वपितृ अमावस्या तिथि की शुरुआत- 9 अक्टूबर को रात 9 बजकर 35 मिनट पर
सर्वपितृ अमावस्या तिथि का समापन- 10 अक्टूबर को रात 9 बजकर 19 मिनट पर

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

श्राद्ध और तर्पण के लिए

कुतुप मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक
रौहिण मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से दोपहर 1 बजकर 18 मिनट तक
अपराह्न काल- दोपहर 1 बजकर 18 मिनट से दोपहर 3 बजकर 37 मिनट तक

यह भी पढ़ें- सर्वपितृ अमावस्या 2026 : पितरों की विदाई पर गलती से भी घर न लाएं ये चीजें, वरना शुरू हो सकता है बुरा वक्त

यह भी पढ़ें- सर्वपितृ अमावस्या 2026: पितृ दोष दूर करने का सबसे बड़ा मौका, हाथ से न जाने दें, जरूर करें ये 5 दान

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।