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सर्वपितृ अमावस्या 2026: पितृ दोष दूर करने का सबसे बड़ा मौका, हाथ से न जाने दें, जरूर करें ये 5 दान

Published: Thu, 01 Oct 2026 11:55 AM (IST)

सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को है। इस दिन दान का खास महत्व है। जानिए वे कौन-सी चीजें हैं जिनका दान ...और पढ़ें

सर्वपितृ अमावस्या पर क्या दान करें? (AI-Generated Image)

सर्वपितृ अमावस्या पर क्या दान करें? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 26 सितंबर से पितृ पक्ष की शुरूआत हो चुकी है। हिंदू धर्म में इस अवधि का बहुत गहरा महत्व है। इसका समापन 'सर्वपितृ अमावस्या' के दिन होता है। इस बार 10 अक्तूबर 2026 को अमावस्या के साथ यह 15 दिनों का समय समाप्त हो जाएगा। मान्यता के अनुसार, इस दिन हम उन सभी पूर्वजों का श्राद्ध कर सकते हैं जिनकी मृत्यु की सही तिथि हमें याद नहीं है या किसी कारणवश छूट गई है।

बड़े-बुजुर्गों का कहना है कि सर्वपितृ अमावस्या पर सच्चे मन से किया गया दान सीधे पितरों तक पहुंचता है। इससे न सिर्फ उनकी आत्मा को तृप्त होती है, बल्कि घर-परिवार पर मंडरा रहा 'पितृ दोष' भी दूर हो जाता है। अगर आप भी अपने पितरों को खुश करना चाहते हैं, तो इस अमावस्या कुछ खास चीजों का दान जरूर करें। चलिए जानते हैं वो कौन-सी चीजें हैं जिनका दान करने से आपको पितृ दोष से छुटकारा मिल सकता है।

इन चीजों का करें दान-

  • अन्न और काले तिल का दान: शास्त्रों में किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को भोजन कराना या कच्चा राशन (आटा, दाल, चावल) देना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। इसके अलावा, पितृ कर्म में काले तिल का इस्तेमाल बहुत पवित्र माना गया है। इसलिए इस दिन काले तिल का दान जरूर करें।
  • कपड़े और जरूरत का सामान: अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद को धोती-कुर्ता, साड़ी या कोई भी पहनने लायक नया कपड़ा दान दें। आप घर के इस्तेमाल की चीजें जैसे बर्तन, नमक या तेल भी दे सकते हैं।
  • घी, गुड़ और फल: पितरों को खुश करने के लिए शुद्ध देसी घी, गुड़ और ताजे मौसमी फलों (जैसे अमरूद, सेब, केले) का दान करना बहुत सात्विक और फलदायी उपाय माना गया है।
  • चांदी का दान: मान्यताओं के अनुसार, चांदी को पितरों की धातु कहा गया है। अगर आप आर्थिक रूप से सक्षम हैं, तो चांदी की कोई भी वस्तु या सिक्का दान कर सकते हैं। ये बहुत ही ज्यादा फलदायी माना गया है लेकिन अगर आपकी क्षमता है तभी ये दान करना सही होगा।
  • गौ माता और बेजुबानों की सेवा: श्राद्ध तब तक पूरा नहीं माना जाता जब तक आप बेजुबानों का हिस्सा न निकालें। गाय को हरा चारा खिलाना और कुत्तों-कौवों को भोजन देना (पंचबलि कर्म) आपके श्राद्ध को सफल बनाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।