श्राद्ध में ब्राह्मण भोज कराने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, छोटी सी गलती पड़ सकती है भारी
श्राद्ध में ब्राह्मण भोज का विशेष महत्व है, जिससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और अनुष्ठान पूर्ण होता ...और पढ़ें

श्राद्ध में ब्राह्मण भोज के नियम: पूर्वजों की शांति के लिए इन बातों का रखें ध्यान (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
ब्राह्मण भोज के लिए भोजन शुद्ध और सात्विक होना चाहिए।
भोजन परोसने का क्रम, जल और दक्षिणा का ध्यान रखें।
गलती से बचने के लिए नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म के किसी भी अनुष्ठान में से ब्राह्मण भोज कराना जरूरी माना जाता है। मुख्य रूप से पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म तभी पूर्ण माना जाता है जब श्राद्ध की तिथि में ब्राह्मण को भोजन कराया जाता है। यह एक ऐसी परंपरा है जिससे किसी भी अनुष्ठान की पूर्णता मानी जाती है।
ब्रह्मण भोज के माध्यम से भोजन पूर्वजों तक जाता है और उनकी आत्मा को शांति मिलती है। मान्यता है कि जब कोई संतुष्ट ब्राह्मण पूरी श्रद्धा और सही रीति-रिवाज़ों के साथ परोसा गया भोजन ग्रहण करता है, तो कहीं भी मौजूद पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति होती है।
गरुड़ पुराण में भी श्राद्ध पक्ष के दौरान ब्राह्मण भोज के माहत्म्य को बताया गया है और इसे एक अनिवार्य कर्म कहा गया है। वहीं ब्राह्मण भोज के साथ इसके कुछ जरूरी नियमों का पालन भी जरूरी होता है, अन्यथा यह भोज स्वीकार्य नहीं माना जाता है। आइए आपको बताते हैं अगर आप पितृ श्राद्ध के दौरान ब्राह्मण भोज करा रहे हैं तो किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
शुद्धता से बना भोजन परोसें
आपको इस बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि ब्राह्मण का भोज हमेशा शुद्धता के साथ तैयार किया जाना चाहिए। भोजन पूर्ण रूप से सात्विक होना चाहिए और इसमें किसी भी तरह की तामसिक चीजें जैसे लहसुन, प्याज का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
जो महिला भोजन तैयार करे उसका मन भी शुद्ध होना चाहिए और कभी भी बुरे विचारों के साथ भोजन नहीं बनाना चाहिए। यही नहीं शरार की शुद्धि भी जरूरी है जैसे पीरियड्स के दौरान ब्राह्मण भोज नहीं बनाना चाहिए। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि अगर ब्राह्मण के लिए भोजन नकारात्मक माहौल में बनाया जाए, तो वह न तो पूर्वजों को स्वीकार्य होता है और न ही श्राद्ध पूजा का पूर्ण फल मिलता है।
ब्राह्मण भोजन परोसने का सही क्रम
पितृ पक्ष में ब्राह्मण भोज में खाना परोसने का एक खास क्रम होता है जिसका पालन करना जरूरी माना जाता है। इसके लिए ब्राह्मणों को दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए और भोजन परोसने से पहले पंचबलि कर्म जरूरी है। जिसमें गाय, कौए, कुत्ते, चींटी और देवों के लिए भोजन निकलना चाहिए।
यदि संभव हो, तो ब्राह्मण को भोजन पत्तल में परोसें। आपको लोहे या स्टील के बर्तनों में भोज कराने से बचना चाहिए। ध्यान रहे कि ब्राह्मण को कभी भी भोजन बाएं हाथ से न परोसें।
भोजन और पानी एक साथ परोसें
आप जब भी ब्राह्मण भोज परोसें सबसे पहले पानी रखना जरूरी होता है। ब्राह्मण के पास भोजन के साथ पानी भी रखना एक अनिवार्य नियम माना जाता है। वो हमेशा भोजन जल का आचमन करके ही शुरू करते हैं और भोज समाप्त करके भी जल से थाली को आचमन करते हैं। पानी के बिना परोसा भोज पूर्ण नहीं माना जाता है।
ब्राह्मण भोज के बाद दक्षिणा जरूरी
ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद उन्हें दक्षिणा देना जरूरी माना जाता है। यह भोज का सबसे अनिवार्य चरण है जिसके बिना पूर्वजों को भी भोज स्वीकार्य नहीं होता है। पितृ पक्ष में ब्राह्मण को आदरपूर्वक भोजन कराने के बाद, अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें। भोज के अंत में ब्राह्मणों से हाथ जोड़कर प्रार्थना करें और और किसी भी प्रकार की गलती या कमी के लिए क्षमा मांगें।
अगर आप भी पितृ पक्ष के दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं, तो उसके नियमों का पालन जरूरी है। जिससे पूर्वजों की कृपा भी बनी रहे और ब्राह्मण के साथ पितरों को भोज स्वीकार्य हो।
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