कहीं रूठ न जाएं पितर! पीरियड्स के दौरान श्राद्ध का भोजन बनाना सही है या गलत?
पितृ पक्ष में पूर्वजों को भोजन अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। आइए जानें यदि श्राद्ध ...और पढ़ें

पितृ पक्ष में मासिक धर्म के दौरान श्राद्ध का भोजन बनाने के नियम (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
मासिक धर्म के दौरान पितरों के लिए भोजन बनाना वर्जित।
मनुस्मृति में भी रजस्वला स्त्री को श्राद्ध भोजन से दूर रखने का उल्लेख।
असमर्थता पर घर के पुरुष या अन्य महिला भोजन तैयार करें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का समय बहुत मत्वपूर्ण होता है और ये सोलह दिन पूरी तरह से पूर्वजों को समर्पित होते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में पितर हमारे आस-पास किसी न किसी रूप में मौजूद होते हैं और हम जो भी भोजन और जल उनके नाम से अर्पित करते हैं वो सीधे उनके पास पहुंचता है।
इसी वजह से इन दिनों में तर्पण करने के साथ पंचबलि भोग भी निकाला जाता है। इसी वजह से श्राद्ध की अवधि के दौरान पूर्वजों के लिए भोजन बनाना एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना होता है।
यही नहीं इस भोजन को बड़ी ही शुद्धता और नियमों के साथ बनाने का विधान है क्योंकि पितरों को पितृ पक्ष के दौरान ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है।
आमतौर पर पूर्वजों के लिए भोजन घर की महिलाएं तैयार करती हैं, ऐसे में अगर कभी अगर श्राद्ध की मुख्य तिथि पर पीरियड्स या मासिक धर्म आ जाएं, तो मन में एक सवाल आता है कि इस दौरान पूर्वजों के लिए भोजन बनाना ठीक है या नहीं? आइए आपको बताते हैं इसके सही नियमों के बारे में।
क्या पीरियड्स के दौरान पितरों के लिए भोजन बनाना ठीक है?
हिंदू परंपराओं के अनुसार महिलाओं को पीरियड्स के दौरान धार्मिक गतिविधियों में शामिल न होने की सलाह दी जाती है। ऐसे में जब पितृ पक्ष में पूर्वजों का स्थान सर्वोपरि है तो श्राद्ध की तिथि वाले दिन पीरियड्स आने पर आपको पूर्वजों के लिए भोजन नहीं बनाना चाहिए।
हालांकि, यह पूरी तरह से सिर्फ शास्त्रों के नियम नहीं है बल्कि ऐसा इसलिए भी है क्योंकि महिलाओं को इस दौरान आराम की भी जरूरत होती है और उनके शरीर में शक्ति कम न हो, इसलिए काम करने से मन किया जाता है। इस वजह से उन्हें श्राद्ध का भोजन बनाने से भी मना किया जाता है।
मनुस्मृति में लिखी है यह बात
महिलाओं के लिए पीरियड्स के दौरान भोजन न बनाने की बात को मनुस्मृति के तीसरे अध्याय के एक श्लोक में बताया गया है-
चाण्डालश्च वराहश्च कुक्कुटः श्वा तथैव च ।
रजस्वला च षण्डश्च नेक्षेरन्नश्नतो द्विजान् ॥
इस श्लोक का मतलब यह है कि श्राद्ध के समय भोजन करते समय या अन्न खिलाते समय चांडाल, सूअर, मुर्गा, कुत्ता, रजस्वला स्त्री यानी पीरियड्स से गुजर रही महिला और नपुंसक व्यक्ति इन सभी की दृष्टि भोजन करने वाले ब्राह्मण पर नहीं पड़नी चाहिए। इसी वजह से जब भोजन को देखना वर्जित है, तो यह इस दौरान श्राद्ध का भोजन बनाने से भी पूरी तरह मना किया जाता है। मान्यता यह है कि इस तरह से बनाया गया भोजन पूर्वजों को स्वीकार्य नहीं होता है।
श्राद्ध की तिथि में पीरियड्स आ जाएं तो क्या करें?
अगर आपके घर में सास-ससुर या किसी अन्य व्यक्ति का श्राद्ध है और पीरियड्स आ जाएं, तो भोजन बनाने के कुछ नियमों का पालन करें-
- आप घर की किसी अन्य महिला से पूर्वजों और ब्राह्मण के लिए भोजन तैयार कराएं। यदि कोई अन्य स्त्री भी भोजन बनाने में असमर्थ है, तो घर के पुरुष भोजन तैयार करे।
- यदि ऐसा भी संभव न हो, तो श्राद्ध की तिथि के दिन सिर्फ तर्पण करें और ब्राह्मण को भोजन सर्वपितृ अमावस्या के दिन कराएं और इसी दिन पूर्वजो के लिए भी भोजन निकालें।
- महिलाएं श्राद्ध की तिथि के दिन पूर्वजों के लिए भोजन तैयार करने में असमर्थ होने पर उनसे क्षमा प्रार्थना करें और घर के पुरुष सामर्थ्य अनुसार पूर्वजों के निमित्त अनाज का दान किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को करें।
धार्मिक मान्यताओं के आधार पर महिलाओं को यदि श्राद्ध की तिथि के दिन पीरियड्स आ जाएं, तो पूर्वजों के लिए भोजन नहीं बनाना चाहिए। इससे पूर्वजों को तृप्ति नहीं मिलती है। पूर्वजों का भोजन अत्यंत शुद्धता के साथ तैयार करने की सलाह दी जाती है।
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