विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पूर्वजों के श्राद्ध की तिथि भूल गए हैं तो क्या करना चाहिए, किस दिन करें पितरों के निमित्त तर्पण और पिंड दान?

Published: Wed, 09 Sep 2026 11:39 AM (IST)

पितृ पक्ष में पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि आप किसी वजह से श्राद्ध की ...और पढ़ें

श्राद्ध की तिथि भूलने पर सर्वपितृ अमावस्या पर करें तर्पण और पिंड दान (Picture Credit: AI Generated)

श्राद्ध की तिथि भूलने पर सर्वपितृ अमावस्या पर करें तर्पण और पिंड दान (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. पितृ पक्ष में पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण करें।

  2. तिथि भूलने पर सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करें।

  3. अज्ञात तिथि वालों का भी श्राद्ध इस दिन करें।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है और यह हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा और आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। पूर्णिमा से लेकर अश्विन माह की अमावस्या तिथि तक का समय पूर्वजों के श्राद्ध के लिए विशेष माना जाता है।

ऐसी मान्यता है कि इन सोलह दिनों की अवधि में पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों से भोजन और जल ग्रहण करते हैं। इस साल पितृ पक्ष का आरंभ 26 सितंबर को हो रहा है और इसकी हर तिथि में उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है जिसमें उनकी मृत्यु हुई होती है।

इस दौरान जो विधि-विधान से और श्रद्धा पूर्वक अपने पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करता है उसके जीवन में कभी भी पितृ दोष नहीं लगता है और पूर्वजों का आशीर्वाद भी मिलता है। वहीं कई बार ऐसा भी होता है कि पूर्वजों की सही तिथि का अनुमान नहीं होता है या फिर किसी वजह से उस तिथि पर श्राद्ध कर्म न हो पाएं, तो मन में एक सवाल यह भी आता है कि कब पितरों के लिए तर्पण और पिंड दान कर सकते हैं? आइए आपको बताते हैं इसके बारे में।

पूर्वजों के श्राद्ध की तिथि भूल जाएं तो क्या करें?

अगर आप किसी वजह से अपने पूर्वजों के श्राद्ध की तिथि भूल गए और उस दिन उनके निमित्त श्राद्ध कर्म नहीं कर पाएं, तो आप पितृ पक्ष के समापन पर यानी सर्वपितृ अमावस्या के दिन उनका श्राद्ध कर सकते हैं।

इस दिन किया गया श्राद्ध और तर्पण पूर्वजों को प्रसन्न करता है और आपको उतना ही फल मिलता है जितना तिथि वाले दिन श्राद्ध करने का। सर्वपितृ अमावस्या के दिन उन लोगों का भी श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात न हो या फिर जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो। इस साल सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को मनाई जाएगी और इस दिन किया गया श्राद्ध सर्वश्रेष्ठ होगा।

पितृ पक्ष का महत्व क्या है?

पितृ पक्ष, 16 दिनों की एक पवित्र अवधि है जब हिंदू धर्म के लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं। हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार, यह भाद्रपद की पूर्णिमा और और आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ता है। पितृ पक्ष में पिंड दान, तर्पण और श्राद्ध पूजा जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं और पूर्वजों का आशीर्वाद लिया जाता है।

इस दौरान अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगना और दिवंगत आत्माओं की शांति और मुक्ति के लिए प्रार्थना करना सबसे जरूरी माना जाता है। पितृ पक्ष में नियमित तर्पण किया जाता है और जिस दिन उनकी मृत्यु की तिथि होती है उस दिन पिंड दान करके गाय, कौए और कुत्ते को भोजन कराया जाता है।

भगवद गीता के अध्याय 9 के श्लोक 25 में भगवान कृष्ण बताते है कि पूर्वजों की पूजा देवताओं से भी बढ़कर है और उनके निमित्त श्राद्ध कर्म करने से पूर्वजों के साथ देवता भी प्रसन्न होते हैं।

पितृ पक्ष में क्यों किया जाता है पूर्वजों का श्राद्ध?

पितृ पक्ष के सोलह दिनों में पूर्वजों का श्राद्ध करने का सबसे पहला और जरूरी उद्देश्य उन्हें याद करना और उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना करना होता है।

श्राद्ध अपने पूर्वजों के प्रति धन्यवाद व्यक्त करने का एक अच्छा तरीका माना जाता है। इसका उद्देश्य है कि पिछली पीढ़ियों से हमें जो कुछ भी मिलता है जैसे पारिवारिक परंपराएं, संस्कार, ज्ञान, संपत्ति, संस्कृति और यहां तक कि हमारा अस्तित्व वह पितृ पक्ष के कर्मों की वजह से पीढ़ियों के बीच एक जुड़ाव बनाता है। इसी वजह से पितृ पक्ष में श्राद्ध के साथ तर्पण और पिंड दान जैसे कर्म किए जाते हैं।

यदि पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो या किसी वजह से आप भूल जाएं, तो पितृ पक्ष के समापन वाले दिन सर्वपितृ अमावस्या पर किया गया श्राद्ध और तर्पण पूरी तरह से मान्य होगा।

यह भी पढ़ें- साल 2026 में इस दिन से शुरू हो रहा है पितृ पक्ष, जानें श्राद्ध का पूरा कैलेंडर?

यह भी पढ़ें- पितृ पक्ष में काले तिल का इस्तेमाल करना क्यों माना जाता है सबसे ज्यादा शुभ?

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।