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पितृ पक्ष में श्राद्ध के दिन बाल, दाढ़ी और नाखून कटवाने चाहिए या नहीं? यहां पढ़ें धार्मिक नियम

Published: Sun, 13 Sep 2026 01:00 PM (IST)

पितृ पक्ष में पूर्वजों को समर्पित श्राद्ध कर्म के दौरान बाल, दाढ़ी और नाखून काटने से बचना चाहिए। विशेषकर श्राद्ध ...और पढ़ें

पितृ पक्ष में श्राद्ध के दिन बाल दाढ़ी और नाखून काटने के धार्मिक नियम (Picture Credit: AI Generated)

पितृ पक्ष में श्राद्ध के दिन बाल दाढ़ी और नाखून काटने के धार्मिक नियम (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. पितृ पक्ष में बाल, दाढ़ी, नाखून काटने से बचें।

  2. श्राद्ध की मुख्य तिथि पर इन कार्यों से परहेज करें।

  3. पितृ कर्म करने वाले व्यक्ति को विशेष ध्यान रखना चाहिए।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष के सोलह दिनों को बहुत खास माना जाता है और यह समय पूर्ण रूप से पूर्वजों को समर्पित होता है। पितृ पक्ष को श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है और इस अवधि में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि जिस भी तिथि में पूर्वजों की मृत्यु हुई होती है उसी में उनका श्राद्ध करना चाहिए जिससे पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। पितृ पक्ष में कई नियमों का पालन किया जाता है जिससे पूर्वजो प्रसन्न होते हैं और धरती से वापस अपने वंशजो के हाथों तृप्त होकर जाते हैं।

पितृ पक्ष के नियमों में से एक हैं इस अवधि में बाल या दाढ़ी न कटवाना और नाखून न काटना। आप आपको बताते हैं क्या इस दौरान मुख्य रूप से श्राद्ध की मुख्य तिथि के दिन आपको बाल या दाढ़ी कटवानी चाहिए या नहीं?

कब से शुरू हो रहा है पितृ पक्ष?

इस साल पितृ पक्ष का आरंभ भाद्रपद की पूर्णिमा तिथि यानी 26 सितंबर से हो रहा है। ऐसे में जो लोग पूर्णिमा का श्राद्ध करते हैं वो इसी दिन पूर्वजों का श्राद्ध करेंगे, लेकिन अन्य लोगों के लिए पितृ पक्ष का आरंभ 27 सितंबर यानी कि प्रतिपदा से हो रहा है और इसका समापन 14 अक्टूबर यानी सर्वपितृ अमावस्या से होगा।

पितृ पक्ष की पूरी अवधि में पितरों के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म को प्रमुख माना जाता है और इस दौरान ब्राह्मण भोज का भी विशेष महत्व होता है।

क्या पितृ पक्ष में बाल, नाखून या दाढ़ी कटवानी चाहिए?

वैसे तो पितृ पक्ष के पूरे 15 या 16 दिनों में आपको इसके नियमों के अनुसार बाल नहीं कटवाने चाहिए और दाढ़ी बनाने या नाखून काटने से बचना चाहिए। वैसे तो यह नियम उन सभी के लिए लागू होता है जिनके घर में कोई भी पूर्वजों के लिए तर्पण या श्राद्ध किया जाता है, लेकिन आपको मुख्य रूप से श्राद्ध की तिथि वाले दिन इन चीजों से परहेज करना चाहिए।

वैसे यह नियम मुख्य रूप से उस व्यक्ति पर लागू होता है जो किसी भी पूर्वज के लिए तर्पण या पिंड दान करता है। जो भी इस दौरान पूर्वजों की पूजा के विपरीत कर्म करता है उसे पितरों का आशीर्वाद नहीं मिलता है, बल्कि वो नाराज होकर धरती से चले जाते हैं।

मुख्य रूप से किसे नहीं कटवाने चाहिए बाल और ढाढ़ी?

मनुस्मृति के अनुसार, जब कोई व्यक्ति किसी भी अनुष्ठान या व्रत में बैठता है, तब उसके लिए 'क्षौर कर्म 'यानी कि शरीर के अतिरिक्त बालों को काटना, दाढ़ी-मूंछ साफ करना या नाखून काटना जैसे कामों को न करने की सलाह दी जाती है। पितृ पक्ष को भी 16 दिनों का एक अनुष्ठान माना गया है जो पूर्वजों को समर्पित है, इसलिए इस दौरान इन कामों से बचना ही बेहतर है। 

जो व्यक्ति पितृ कर्म करता है यानी श्राद्ध पक्ष में हर रोज तर्पण करता है उसे बाल, दाढ़ी-मूंछ या नाखून काटने से परहेज करना चाहिए। हालांकि, अन्य लोग किसी विशेष परिस्थिति में नाखून काट सकते हैं, वहीं बालों को काटने से बचना चाहिए। यही नहीं आपको इस दौरान श्रृंगार या साज-सज्जा की चीजों से भी बचना चाहिए, क्योंकि यह पूरा समय पूर्वजों को समर्पित होता है।

आपको इस दौरान अपना ध्यान पूरी तरह से पूर्वजों पर ही केंद्रित करना चाहिए जिससे उनका आशीर्वाद मिले। ऐसे में यदि आप पितृ पक्ष के आरंभ होने ये पहले यानी पूर्णिमा तिथि को ही ये कार्य कर लें तो बेहतर होगा।

पितृ पक्ष का समय पितृ ऋण चुकाने के लिए खास माना जाता है, इसलिए वंशजों को इन दौरान सभी कर्म पूर्वजों की शांति के लिए ही करने चाहिए।

पितृ पक्ष के दौरान आपको बाल और दाढ़ी काटने के अलावा भी कई नियमों का पालन करना चाहिए, जिससे पूर्वजों की कृपा बनी रहे।

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