भूलकर भी न करें ये गलती! क्या श्राद्ध में इस्तेमाल हुई सामग्री को सामान्य पूजा में रख सकते हैं?
श्राद्ध कर्मों में इस्तेमाल की गई सामग्री को सामान्य देवी-देवताओं की पूजा में उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि पितरों और देवताओं का स्थान अलग-अलग होता है।

श्राद्ध सामग्री का क्या करें: सामान्य पूजा में इस्तेमाल की गलती से बचें (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
श्राद्ध सामग्री को सामान्य पूजा में उपयोग न करें।
पितरों और देवताओं का स्थान हिंदू धर्म में भिन्न है।
बची सामग्री को सर्वपितृ अमावस्या के बाद विसर्जित करें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है और इस दौरान पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए विशेष कर्म किए जाते हैं। पूर्वजों के नाम से तर्पण करना और उनके लिए भोजन निकालना प्रमुख माना जाता है।
श्राद्ध पक्ष में लोग पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए तर्पण और पिंडदान जैसे कई कर्म करते हैं। पूर्वजों के लिए किए जाने वाले सभी श्राद्ध कर्मों में तिल, जौ, चावल, जौ का आटा, रोली, मौली जैसी कई सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है और कई बात पूर्वजों की पूजा के बाद यह सामग्री बच जाती है।
ऐसे में लोगों के मन में एक आम सवाल यह आता है कि इस बची हुई सामग्री का इस्तेमाल क्या बाद में पूजा में किया जा सकता है? आइए आपको बताते हैं श्राद्ध कर्मों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का क्या करना चाहिए?
श्राद्ध में कौन सी चीजों का इस्तेमाल होता है?
श्राद्ध के दौरान पितरों की पूजा में काला तिल, जौ, चावल, जौ का आटा, रोली, कलावा, धूप, घी, फल, फूल माला, बरगद का पत्ता, गोबर का उपला या कंडा, पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची और कपूर का इस्तेमाल होता है।
ये सभी सामग्रियां ऐसी हैं जिनका इस्तेमाल रोज की पूजा में भी होता है, लेकिन मुख्य रूप से जब ये चीजें श्राद्ध के लिए उपयोग की जाती हैं, तब बची सामग्रियों की देवी-देवताओं के न तो पूजन में प्रयोग करना चाहिए और न ही इन्हें घर में किसी अन्य कामों में उपयोग करना चाहिए।
क्या श्राद्ध सामग्री पूजा में इस्तेमाल कर सकते हैं?
श्राद्ध के दौरान किए गए कोई भी कर्म पूर्वजों को समर्पित होते हैं और इससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है। इन कर्मों का उद्देश्य पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना होता है और इससे वंशजों को आशीर्वाद मिलता है। आमतौर पर पितरों की पूजा में उन्हीं चीजों का इस्तेमाल किया जाता है जो आप आम पूजा में इस्तेमाल करते हैं।
विशेष रूप से पिंडदान, तर्पण या पितरों को अर्पित की गई सभी सामग्रियों को आपको आम पूजा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पुराणों में पूर्वजों का स्थान ईश्वर से अलग बताया गया है। इसी वजह से पितर पूजा में इस्तेमाल किसी भी सामग्री को भगवान की पूजा में प्रयोग नहीं करना चाहिए।
श्राद्ध की बची हुई सामग्री का क्या करें?
पितरों की पूजा के बाद जो भी सामग्री बच जाती है, आप उसे सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों के विसर्जन की पूजा में प्रयोग कर सकते हैं। आप इन चीजों को सर्वपितृ अमावस्या के बाद घर से बाहर निकला दें। इन्हें आप किसी पवित्र नदी में श्रद्धा पूर्वक प्रवाहित कर दें। बची हुई किसी भी सामग्री को घर में पूजन या भोजन से जुड़ी चीजों के लिए इस्तेमाल में न लाएं।
अगर आप भी घर में पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं, तो इसमें इस्तेमाल हुई सामग्रियों के लिए यहां बताई बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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