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Pitru Paksha 2026: कितने प्रकार के होते हैं तर्पण, क्या महिला और पुरुष अलग-अलग तरीके से तिलांजलि देते हैं?

Published: Sat, 26 Sep 2026 05:27 PM (IST)

पितृ पक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किए जाने वाले तर्पण के पांच मुख्य प्रकार होते हैं। ...और पढ़ें

पितृ पक्ष में तर्पण करने का महत्‍व। (Picture Credit- AI Generated)

पितृ पक्ष में तर्पण करने का महत्‍व। (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पितृ पक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनकी तृप्ति के लिए तर्पण और श्राद्ध करने की धार्मिक रीति है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तर्पण के माध्यम से हम पितरों के प्रति श्रद्धा और प्रेम व्यक्त करते हैं। तर्पण करते समय जल के साथ कुश, काले तिल, जौ और अक्षत जैसी सामग्री का प्रयोग किया जाता है।

एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषीय चंद्रेश शर्मा जी के अनुसार, 'पितृ पक्ष और अमावस्या के दौरान मुख्य रूप से पांच प्रकार के तर्पण का विधान बताया गया है। आइए जानते हैं इनके बारे में और यह भी समझते हैं कि महिला और पुरुषों के लिए तिलांजलि देने के नियमों में क्या अंतर है।'

पितृ पक्ष में कितने प्रकार के होते हैं तर्पण?

हिंदू धर्म के अनुसार तर्पण को अलग-अलग वर्गों में बांटा गया है। इनके माध्यम से देवताओं, ऋषियों और पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। आइए इसे विस्‍तार से समझते हैं-

1. देव तर्पण

देव तर्पण देवताओं की तृप्ति और उनके प्रति आभार व्यक्त करने के लिए किया जाता है। इसमें जल अर्पित कर देवताओं का स्मरण किया जाता है।

2. ऋषि तर्पण

ऋषि तर्पण महान ऋषियों और संतों को समर्पित होता है। इसमें ऋषियों का स्मरण करते हुए जल अर्पित किया जाता है।

3. दिव्य मानव तर्पण

दिव्य मानव तर्पण उन दिव्य पुरुषों और संतों के लिए किया जाता है, जिन्हें हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त होता है।

4. दिव्‍य पितृ तर्पण

यह तर्पण दिव्य पितरों की शांति और उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए किया जाता है। इसमें श्रद्धा के साथ जल अर्पित करने की रीति है।

5. पितृ तर्पण

पितृ तर्पण अपने परिवार, कुल और पूर्वजों के लिए किया जाता है। पितृ पक्ष में किया जाने वाला यह तर्पण सबसे प्रमुख माना जाता है। इसमें जल के साथ काले तिल और कुश का प्रयोग किया जाता है।

क्या महिला और पुरुष अलग-अलग तरीके से तिलांजलि देते हैं?

हिंदू धर्म और गरुड़ पुराण के अनुसार पुरुषों और महिलाओं के लिए तर्पण की विधि में कुछ अंतर होता है। चलिए इसे विस्‍तार से जानते हैं।

पुरुषों के लिए तिलांजलि का नियम

परंपरागत विधि के अनुसार पुरुष दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को तर्पण देते हैं। इस दौरान कुश और काले तिल का प्रयोग किया जाता है। जनेऊ धारण करने वाले पुरुष पितृ तर्पण के समय जनेऊ को दाहिने कंधे की ओर करके अपसव्य स्थिति में तर्पण करते हैं।

महिलाओं के लिए तिलांजलि का नियम

महिलाएं भी पितरों के लिए तर्पण और तिलांजलि दे सकती हैं। विशेष रूप से परिवार में पुरुष या पुत्र न होने की स्थिति में महिलाओं द्वारा पितृ कर्म किया जा सकता है। महिलाएं जनेऊ धारण नहीं करतीं, इसलिए उनके लिए जनेऊ से जुड़ा नियम लागू नहीं होता। वे कुश और काले तिल के साथ दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को जल अर्पित कर सकती हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।