Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में पितरों को कैसे दें तर्पण, नोट कर लें तिथि के हिसाब से श्राद्ध का सही मुहूर्त
पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू हो गए हैं, जिसमें पितरों को तर्पण और श्राद्ध कर्म किया जाएगा। चलिए श्राद्ध ...और पढ़ें

पितृ पक्ष में पितरों को तर्पण देने का सही समय । (Picture Credit- AI Generated)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 26 सितंबर से पितृ पक्ष की शुरुआत हो गई है। अब हर हिंदू परिवार में पितरों को तर्पण देने और तिथि के हिसाब से श्राद्ध कर्म किया जाएगा। ऐसे में हर तिथि के हिसाब से किसी दिन किस समय पर पितरों की पूजा, श्राद्ध कर्म और तर्पण किया जाना चाहिए, इस विषय पर हम आपको विस्तृत जानकारी देंगे। पंचांग भेद के कारण इस बार चतुर्थी-पंचमी और षष्ठी-सप्तमी का श्राद्ध एक साथ भी मनाया जा रहा है। कहीं-कहीं पर स्थानीय मान्यताओं के कारण पंचमी तिथि 1 अक्टूबर की भी मानी जा रही है। तो चलिए इस कैलेंडर के माध्यम से समझते हैं कि किस दिन कौन सी तिथि पड़ रही है और किस मुहूर्त पर श्राद्ध करना ठीक रहेगा।
| दिनांक | तिथि | मुहूर्त |
| 26 सितंबर | पूर्णिमा श्राद्ध | कुतुप मुहूर्त -सुबह 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक रौहिण मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से 1 बजकर 25 मिनट तक अपराह्न काल- दोपहर 1 बजकर 25 मिनट से 3 बजकर 45 मिनट तक |
| 27 सितंबर | प्रतिपदा श्राद्ध | कुतुप मुहूर्त - दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रौहिण मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 53 मिनट से 1 बजकर 42 मिनट तक अपराह्न काल- दोपहर 1 बजकर 42 मिनट से 4 बजकर 6 मिनट तक |
| 28 सितंबर | द्वितीया श्राद्ध | कुतुप मुहूर्त -सुबह 11 बजकर 31 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक रौहिण मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 36 मिनट से 1 बजकर 24 मिनट तक अपराह्न काल-दोपहर 1 बजकर 24 मिनट से 3 बजकर 52 मिनट तक |
| 29 सितंबर | तृतीया/महा भरणी श्राद्ध | कुतुप मुहूर्त - सुबह 11 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रौहिण मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से 1 बजकर 23 मिनट तक अपराह्न काल-दोपहर 1 बजकर 23 मिनट से 3 बजकर 49 मिनट तक |
| 30 सितंबर | चतुर्थी-पंचमी श्राद्ध | कुतुप मुहूर्त - सुबह 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक रौहिण मुहूर्त-दोपहर 1 बजकर 22 मिनट से 3 बजकर 45 मिनट तक |
| 1 अक्टूबर | पंचमी श्राद्ध | कुतुप मुहूर्त -सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रौहिण मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से 1 बजकर 20 मिनट तक अपराह्न काल- दोपहर 1 बजकर 20 मिनट से 3 बजकर 45 मिनट तक |
| 2 अक्टूबर | षष्ठी और सप्तमी श्राद्ध | कुतुप मुहूर्त -सुबह 11 बजकर 31 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक रौहिण मुहूर्त-दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से 1 बजकर 20 मिनट तक अपराह्न काल- दोपहर 1 बजकर 20 मिनट से 3 बजकर 45 मिनट तक |
| 3 अक्टूबर | अष्टमी श्राद्ध | कुतुप मुहूर्त -सुबह 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक रौहिण मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से 1 बजकर 25 मिनट तक अपराह्न काल-दोपहर 1 बजकर 25 मिनट से 3 बजकर 45 मिनट तक |
| 4 अक्टूबर | नवमी/मातृ नवमी | कुतुप मुहूर्त -सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रौहिण मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से 1 बजकर 20 मिनट तक अपराह्न काल-दोपहर 1 बजकर 20 मिनट से 3 बजकर 45 मिनट तक |
| 5 अक्टूबर | दशमी श्राद्ध | कुतुप मुहूर्त - सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रौहिण मुहूर्त-दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से 1 बजकर 20 मिनट तक अपराह्न काल-दोपहर 1 बजकर 20 मिनट से 3 बजकर 45 मिनट तक |
| 6 अक्टूबर | एकादशी श्राद्ध | कुतुप मुहूर्त -सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रौहिण मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से 1 बजकर 20 मिनट तक अपराह्न काल-दोपहर 1 बजकर 20 मिनट से 3 बजकर 45 मिनट तक |
| 7 अक्टूबर | द्वादशी/मघा श्राद्ध | कुतुप मुहूर्त -सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रौहिण मुहूर्त-दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से 1 बजकर 20 मिनट तक अपराह्न काल-दोपहर 1 बजकर 20 मिनट से 3 बजकर 45 मिनट तक |
| 8 अक्टूबर | त्रयोदशी श्राद्ध | कुतुप मुहूर्त -सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रौहिण मुहूर्त-दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से 1 बजकर 20 मिनट तक अपराह्न काल-दोपहर 1 बजकर 20 मिनट से 3 बजकर 45 मिनट तक |
| 9 अक्टूबर | चतुर्दशी श्राद्ध | कुतुप मुहूर्त -सुबह 11 बजकर 31 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक रौहिण मुहूर्त-दोपहर 1 बजकर 17 मिनट से 3 बजकर 37 मिनट तक |
| 10 अक्टूबर | सर्व पितृ अमावस्या | कुतुप मुहूर्त -सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रौहिण मुहूर्त-दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से 1 बजकर 20 मिनट तक अपराह्न काल-दोपहर 1 बजकर 20 मिनट से 3 बजकर 45 मिनट तक |
पितरों को तर्पण देने की विधि
पितृ पक्ष में तर्पण का अर्थ श्रद्धापूर्वक अपने पितरों का स्मरण करते हुए जल अर्पित करना है। इसके कुछ नियम होते हैं, चलिए उनके बारे में जानते हैं-
- सबेस पहले सुबह स्नान करें और साफ कपड़े पहन लें। तर्पण के लिए एक साफ स्थान पर बैठें। पूजा के लिए एक तांबे या पीतल का पात्र, साफ जल, काले तिल, कुश और पुष्प रखें।
- पितरों से जुड़े कर्मों में दक्षिण दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। इसलिए तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- कुश को पवित्र माना जाता है। इसकी पवित्री बना लें। इसे धारण करने के बाद ही तर्पण करें।
- एक पात्र में साफ जल लें और उसमें थोड़े काले तिल डालें। इसके बाद पितरों का ध्यान करें। अपने परिवार के जिन पूर्वजों का तर्पण करना है, उनका मन में स्मरण करें।
- तर्पण शुरू करने से पहले मन में संकल्प लें कि आप अपने पूर्वजों की शांति और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए यह तर्पण कर रहे हैं।
- अंगूठे और तर्जनी के बीच के हिस्से, जिसे पितृतीर्थ कहा जाता है, से पितरों को जल देना चाहिए।
- महिलाएं भी अपने पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण और तर्पण कर सकती हैं।
- अतः अपने पूर्वजों की तिथि पर आप किसी ब्राह्मण को बुलाकर भी श्राद्ध कर्म करा सकती हैं।
अयह भी पढ़ें- पितृ पक्ष: सपने में पितरों का आना, हंसने-रोने और खाना मांगने का क्या है मतलब? स्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
