पितृ तर्पण से देवी दुर्गा के स्वागत तक... जानिए आश्विन अमावस्या 2026 की सही तिथि, समय और महत्व
अक्टूबर 2026 में आश्विन अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को पड़ रही है, जिसे सर्व पितृ अमावस्या और महालया अमावस्या भी ...और पढ़ें
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अश्विन अमावस्या 2026 डेट और टाइम

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अमावस्या का खास आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। चंद्र पंचांग के मुताबिक, प्रत्येक महीने में एक बार बार आने वाली अमावस्या वह सबसे अंधेरी रात होती है, जब आकाश में चंद्रमा बिल्कुल भी दिखाई नहीं देता है।
कई परंपराओं में अमावस्या को नकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है, जबकि यह दिन गहन आध्यात्मिक चिंतन, पूर्वजों की पूजा और शक्तिशाली अनुष्ठान का भी समय माना जाता है। आइए जानते हैं अक्तूबर 2026 में अमावस्या की सही तिथि और समय।
अमावस्या अक्तूबर 2026 तिथि और समय (Amavasya October 2026 Date and Time)
अश्विन अमावस्या पितृ पक्ष का आखिरी और सबसे जरूरी दिन क्योंकि यह अवधि श्राद्ध और पूर्वजों की पूजा-अर्चना के लिए बेहद पवित्र मानी जाती है।
अक्तूबर 2026 में पड़ने वाली अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या, महालया अमावस्या और आश्विन अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।
यह दिन पितृ पक्ष की समाप्ति और देवी पक्ष की शुरुआत यानी नवरात्रि और देवी दुर्गा की पूजा की शुरुआत का संकेत भी माना जाता है। साल 2026 में आश्विन अमावस्या 10 अक्तूबर 2026, शनिवार को पड़ रही है।
अमावस्या तिथि का समय (Amavasya date time)
अमावस्या तिथि का आरंभ- 09 अक्तूबर 2026 को रात 8 बजकर 32 मिनट पर
अमावस्या तिथि का समापन- 10 अक्तूबर 2026 को रात 9 बजकर 20 मिनट पर
आश्विन अमावस्या का महत्व
हिंदू परंपरा में आश्विन अमावस्या को पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान करने के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में गिना जाता है। अक्तूबर में पड़ने वाली यह अमावस्या अन्य अमावस्याओं की तुलना में इसलिए खास है क्योंकि यह पितृ पक्ष की समाप्ति और शारदीय नवरात्रि के शुरू होने के ठीक बाद पड़ती है।
अश्विन अमावस्या मंत्र
अश्विन अमावस्या के मौके पर दिवंगत आत्माओं के लिए प्रार्थना करते वक्त 'ऊं पितृभ्य: नम:' मंत्र का जाप करना चाहिए।
आश्विन अमावस्या पर क्या न करें?
आश्विन अमावस्या के मौके पर बेवजह की बहस और कठोर शब्दों से बचने की जरूरत है।
इसके अलावा तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए।
बड़ों, पूर्वजों या पारिवारिक परंपराओं का अनादर नहीं करना चाहिए।
बेवजह या हानिकारक कामों को करने से बचना चाहिए।
बिना कारण श्राद्ध अनुष्ठानों को स्थागित करने से बचना चाहिए।
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