सर्वपितृ अमावस्या पर करें ये 4 खास दीपदान, पितरों की तृप्ति के साथ शांत होंगे गृह क्लेश और कालसर्प दोष
सर्वपितृ अमावस्या पर जानें कालसर्प और पितृ दोष से मुक्ति के अचूक उपाय और दीपदान की सही विधि। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, यह अमावस्या बहुत ही खास मानी जा रही है।

सर्वपितृ अमावस्या पर खास उपाय (AI-Generated Image)
HighLights
दक्षिण दिशा में दीपदान पितरों को तृप्ति देता है
पीपल के नीचे दीपक जलाने से पितृ दोष शांत होते हैं
जलाशय में दीपदान अकाल मृत्यु प्राप्त पितरों को शांति देता है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पितृ पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या (Sarva Pitru Amavasya 2026) के साथ होता है, जिसे पितरों की विदाई का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषाचार्य चंद्रेश शर्मा के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 को पड़ने वाली यह अमावस्या उन लोगों के लिए खास मानी जाती है, जो पूरे पितृ पक्ष में किसी वजह से अपने पूर्वजों का श्राद्ध या तर्पण नहीं कर पाए हैं।
इस दिन विधि-विधान से किए गए दीपदान और विशेष उपायों से न केवल ज्ञात-अज्ञात पितरों को तृप्ति मिलती है, बल्कि कुंडली के गंभीर कालसर्प दोष और पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है। चलिए इस आर्टिकल के जरिए जानते हैं कि इस दिन कौन-से उपाय करने से पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है।
सर्वपितृ अमावस्या पर किए जाने वाले मुख्य उपाय
अगर आप इस अमावस्या पर ये 4 आसान उपाय करते हैं तो आप बड़े ही आसानी से पितृ दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति पा सकते हैं।
दक्षिण दिशा का महत्व: दक्षिण दिशा को शास्त्रीय रूप से पितरों की दिशा माना गया है। शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर या आंगन में चौमुखी अथवा तिल के तेल/गाय के घी का दीपक जलाएं।
पीपल के पेड़ के पास दीपदान: सर्वपितृ अमावस्या की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। पीपल में पितरों और भगवान विष्णु का वास माना जाता है। दीपक जलाकर हाथ जोड़कर पितरों से विदाई और क्षमा-याचना करें।
गृह क्लेश शांति का उपाय: घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में शाम को चौमुखी दीपक जलाने से गृह क्लेश और पितृ दोष शांत होते हैं।
जलाशय पर दीपदान: यदि संभव हो तो सूर्यास्त के समय किसी नदी, तालाब या कुएं के पास दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में दीपदान करें। इससे अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए पितरों को शांति मिलती है।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण और दोष शमन
कालसर्प दोष अथवा पितृ दोष की तीव्रता देखने के लिए कुंडली में राहु-केतु के अक्ष, चतुर्थेश, नवमेश तथा सूर्य-चंद्रमा की स्थिति का सूक्ष्म अध्ययन अनिवार्य होता है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन किया गया सात्विक दान और श्रद्धापूर्वक तर्पण हर कुंडली के दोषों को खत्म करने में समर्थ है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
