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कुंडली में है कालसर्प दोष? नाग पंचमी पर करें ये उपाय, राहु-केतु की पीड़ा होगी शांत और खुलेंगे तरक्की के रास्ते

Published: Fri, 14 Aug 2026 04:57 PM (IST)

नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त को मनाया जाएगा, जिस दिन नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व है। इस ...और पढ़ें

कैसे दूर करें कालसर्प दोष? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में नाग पंचमी का त्योहार बहुत ही पवित्र माना जाता है। इस अवसर पर नाग देवता की पूजा-अर्चना करने का अधिक महत्व है। यह पर्व हर साल सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष दूर होता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।

एस्ट्रोपत्री के श्री चंद्रेश शर्मा जी बताते हैं कि ज्योतिष शास्त्र में कालसर्प दोष को जीवन की रुकावटों, मानसिक तनाव और आर्थिक उतार-चढ़ाव का बड़ा कारण माना जाता है। जब कुंडली में सभी सात ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तब कालसर्प योग का निर्माण होता है। नाग पंचमी का दिन नाग देवताओं और राहु-केतु के प्रभावों को शांत करने के लिए वर्ष का सबसे शक्तिशाली अवसर माना गया है। ऐसे में आइए इस कालसर्प दोष निवारण के उपायों के बारे में।

कालसर्प दोष निवारण के अचूक उपाय

कालसर्प दोष से मुक्ति और शांति के लिए नाग पंचमी के दिन निम्नलिखित उपाय करने चाहिए:

चांदी के नाग-नागिन का जलप्रवाह: नाग पंचमी के दिन किसी पंडित से चांदी या तांबे के छोटे नाग-नागिन का जोड़ा बनवाएं। पूजा के दौरान इन पर कच्चे दूध और जल से अभिषेक करें। इसके बाद अपनी मनोकामना बोलते हुए इन्हें बहते हुए जल (पवित्र नदी) में प्रवाहित कर दें। यह उपाय राहु-केतु की पीड़ा को शांत करता है।

शिवलिंग पर विशेष जलाभिषेक: नाग पंचमी के दिन शिव मंदिर जाएं। तांबे के लोटे में जल, थोड़ा सा कच्चा दूध, काले तिल और गंगाजल मिलाएं। शिवलिंग पर इस जल से धारा प्रवाह करते हुए "ॐ नमः शिवाय" या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। शिव जी को नाग अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए उनकी पूजा से कालसर्प दोष निष्प्रभावी हो जाता है।

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रुद्राक्ष और मयूर पंख का प्रयोग: यदि दोष के कारण संतान या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आ रही हैं, तो इस दिन 8 मुखी रुद्राक्ष धारण करना अत्यंत लाभप्रद होता है। इसके अलावा, अपने घर के मुख्य द्वार पर और पूजा घर में मोर पंख लगाएं, क्योंकि मोर नागों का भक्षक है और यह राहु के प्रभाव को कम करता है।

नाग स्तोत्र का पाठ व दान: नाग पंचमी के दिन श्री नवनाग स्तोत्र का 11 बार पाठ करें। पूजा के बाद जरूरतमंदों को काले उड़द, तिल, नीले वस्त्र और सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा का दान करें। इससे अटके हुए काम बनने लगते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।