Sakat Chauth 2026 Fast Rules: इन शुभ योग में रखा जाएगा सकट चौथ का व्रत, न करें ये गलतियां
साल 2026 में सकट चौथ का व्रत (Sakat Chauth 2026) 6 जनवरी यानी मंगलवार को रखा जाएगा। इस साल यह कई सारे शुभ संयोगों के साथ मनाया जाएगा, जो व्रत के फल को ...और पढ़ें

Sakat Chauth 2026 Fast Rules: सकट चौथ व्रत नियम।
दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। नए साल 2026 की शुरुआत में आने वाला सकट चौथ का व्रत इस बार विशेष शुभ संयोगों के साथ मनाया जाएगा। यह व्रत माघ कृष्ण चतुर्थी को रखा जाता है और वर्ष 2026 में सकट चौथ 6 जनवरी, मंगलवार को पड़ेगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन चतुर्थी तिथि में ही चंद्रोदय होने के कारण व्रत का पालन 6 जनवरी को ही करना शास्त्रसम्मत माना गया है। खास बात यह है कि इस दिन (Sakat Chauth 2026) बन रहे शुभ योग व्रत के फल को कई गुना बढ़ाने वाले माने जा रहे हैं, लेकिन कुछ छोटी गलतियां व्रत के पुण्य को प्रभावित भी कर सकती हैं।
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सकट चौथ पर बन रहे हैं ये तीनशुभ योग (Sakat Chauth 2026 Shubh YOG)
6 जनवरी 2026 को सकट चौथ के दिन एक साथ कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 7:15 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक रहेगा, जिसे किसी भी शुभ कार्य के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके साथ ही प्रीति योग पूरे दिन बना रहेगा, जो पारिवारिक सुख और मानसिक शांति प्रदान करने वाला योग है। रात 8:21 बजे के बाद आयुष्मान योग का आरंभ होगा, जो आयु, स्वास्थ्य और संतान सुख से जुड़ा माना जाता है। इन योगों में किया गया पूजन विशेष फल देने वाला होता है।
व्रत रखने की सही विधि (Sakat Chauth 2026 Vrat Rules)
सकट चौथ के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। दिन भर संयम और सात्विकता का पालन करें। शाम को शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करें और चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित कर व्रत पूर्ण करें। मान्यता है कि शुभ योगों में नियमपूर्वक किया गया यह व्रत संतान और परिवार दोनों के लिए रक्षा कवच का कार्य करता है।
सकट चौथ व्रत पर न करें ये गलतियां (Sakat Chauth 2026 Vrat Donts)
शुभ योग होने के बाद भी कुछ सामान्य भूलें व्रत के फल को कम कर सकती हैं जैसे -
चतुर्थी तिथि की सही गणना किए बिना अगले दिन सकट चौथ का व्रत रखना शास्त्रसम्मत नहीं माना जाता।
- पंचमी तिथि में चंद्रमा को अर्घ्य देना व्रत को अधूरा और निष्फल बना सकता है।
- व्रत के दिन क्रोध करना, कटु वचन बोलना और नकारात्मक विचार रखना वर्जित माना गया है।
- तामसिक भोजन का सेवन व्रत की शुद्धता को प्रभावित करता है।
- व्रत के दिन सात्विक आहार और संयमित दिनचर्या अपनाना आवश्यक है।
- बिना स्नान या अशुद्ध अवस्था में भगवान गणेश की पूजा नहीं करनी चाहिए।
- पूजा स्थल और शरीर दोनों की स्वच्छता बनाए रखना व्रत के पूर्ण फल के लिए जरूरी माना गया है।
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लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।

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