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Maa Annapurna Ki Aarti: भगवान शिव की पूजा करते समय जरूर करें ये आरती, अन्न-धन से भरेंगे भंडार

Maa Annapurna Ki Aarti इस व्रत के पुण्य-प्रताप से विवाहित स्त्रियों को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वहीं अविवाहित जातकों की शीघ्र शादी के योग बनते हैं। अतः साधक सोमवार के दिन श्रद्धा भाव से भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा करते हैं। अगर आप भी भगवान शिव की कृपा पाना चाहते हैं तो विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करें।

By Pravin KumarEdited By: Pravin KumarPublished: Mon, 22 Apr 2024 07:00 AM (IST)Updated: Mon, 22 Apr 2024 07:00 AM (IST)
Maa Annapurna Ki Aarti: भगवान शिव की पूजा करते समय जरूर करें ये आरती, अन्न-धन से भरेंगे भंडार

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Maa Annapurna Ki Aarti: सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव संग माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही उनके निमित्त व्रत भी रखा जाता है। शिव पुराण में सोमवार व्रत की महत्ता के बारे में विस्तार से बताया गया है। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से विवाहित स्त्रियों को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वहीं, अविवाहित जातकों की शीघ्र शादी के योग बनते हैं। अतः साधक सोमवार के दिन श्रद्धा-भाव से भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा करते हैं। अगर आप भी भगवान शिव की कृपा पाना चाहते हैं, तो विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करें। साथ ही पूजा के समय ये आरती जरूर करें। मां अन्नपूर्णा यानी मां पार्वती की पूजा करने से घर में अन्न-धन के भंडार भर जाते हैं।  

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1. मां अन्नपूर्णा आरती

आरती देवी अन्नपूर्णा जी की

बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम।

जो नहीं ध्यावै तुम्हें अम्बिके, कहां उसे विश्राम।

अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो, लेत होत सब काम॥

मैया बारम्बार प्रणाम...

प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर, कालान्तर तक नाम।

सुर सुरों की रचना करती, कहां कृष्ण कहां राम॥

मैया बारम्बार प्रणाम...

चूमहि चरण चतुर चतुरानन, चारु चक्रधर श्याम।

चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर, शोभा लखहि ललाम॥

मैया बारम्बार प्रणाम...

देवी देव! दयनीय दशा में दया-दया तब नाम।

त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल शरण रूप तब धाम॥

मैया बारम्बार प्रणाम...

श्रीं, ह्रीं श्रद्धा श्री ऐ विद्या श्री क्लीं कमला काम।

कांति, भ्रांतिमयी, कांति शांतिमयी, वर दे तू निष्काम॥

मैया बारम्बार प्रणाम...

2.  मां पार्वती की आरती

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता

ब्रह्म सनातन देवी, शुभफल की दाता।।

जय पार्वती माता...

अरिकुल पद्दं विनाशिनी, जय सेवक त्राता ।।

जगजीवन जगदंबा, हरिहर गुण गाता ।।

जय पार्वती माता...

सिंह को वाहन साजे, कुण्डल है साथा।

देब बंधु जस गावत, नृत्य करत ता था ।।

जय पार्वती माता...

सतयुग रूप शील अति सुन्दर, नाम सती कहलाता।

हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता ।

जय पार्वती माता...

शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमाचल स्थाता।

सहस्त्र भुज तनु धारिके, चक्र लियो हाथा ।

 जय पार्वती माता...

सृष्टिरूप तुही है जननी, शिवसंग रंगराता।

नन्दी भृंगी बीन लही है, हाथन मदमाता ।।

जय पार्वती माता...

देवन अरज करत, तव चित को लाता।

गावत दे दे ताली, मन में रंग राता ।।

जय पार्वती माता...

श्री कमल आरती मैया की, जो कोई गाता।

सदा सुखी नित रहता, सुख संपति पाता ।

जय पार्वती माता...

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