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पितृ पक्ष 2026: पितरों के तर्पण में काले तिल और कुशा का ही इस्तेमाल क्यों? यहां समझें इसके पीछे की खास वजह

Published: Sun, 04 Oct 2026 08:52 AM (IST)

पितृ पक्ष में पितरों के तर्पण के दौरान काले तिल और कुशा के उपयोग का विशेष महत्व है। यह लेख ...और पढ़ें

कैसे करें पितरों का तर्पण? (Picture Credit- AI Generated)

कैसे करें पितरों का तर्पण? (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2026) को पितरों को प्रसन्न करने के लिए अधिक शुभ माना जाता है। इस दौरान पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन अनुष्ठानों को विधिपूर्वक करने से पितरों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है और पितृ दोष दूर होता है।

पितृ पक्ष में पितरों का तर्पण करते समय काले तिल और कुशा का प्रयोग किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन चीजों के बिना तर्पण अधूरा होता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि तर्पण में काले तिल और कुशा को क्यों शामिल किया जाता है? आइए इस आर्टिकल में आपको इसके बारे में बताते हैं।

कुशा का महत्व

  • हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान कुशा का उपयोग अधिक शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कुशा की उत्पत्ति भगवान विष्णु के बालों से हुई है।
  • पितरों का तर्पण करते समय कुशा की अंगूठी अनामिका उंगली में पहनने का विधान है। ऐसा करने से व्यक्ति का शरीर और मन शुद्ध होता है।
  • आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुशा नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके वातावरण को शुद्ध करने में लाभकारी होती है।

काले तिल का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, काले तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के पसीने से हुई है। इसलिए काले तिल को तर्पण में शामिल किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि तर्पण में काले तिल का उपयोग करने से पितरों की भूख और प्यास लंबे समय तक शांत रहती है। साथ ही उनकी आत्मा को शांति प्राप्त होती है। काले तिल नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों को दूर रखते हैं, जिससे आपका तर्पण बिना किसी बाधा के सीधे आपके पितरों को ही प्राप्त होता है।

कैसे करें पितरों का तर्पण?

  • सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े धारण करें।
  • इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • अब दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके आसन पर बैठें। इसके बाद अपने दाएं हाथ की अनामिका उंगली में कुशा से बनी अंगूठी धारण करें।
  • अब लोटे में जल, थोड़ा गंगाजल, काले तिल, सफेद फूल, जौ और कुशा के कुछ टुकड़े डाल लें।
  • दोनों हाथों को मिलाकर अंजुलि बनाएं और उसमें पात्र से जल लें। जल को हमेशा दाएं हाथ के अंगूठे के मूल भाग से होते हुए नीचे गिराएं।
  • इस दौरान पितरों का ध्यान करें। साथ ही पितृ मंत्र का जप भी किया जा सकता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।