अकाल मृत्यु पाने वाले पितरों का श्राद्ध सामान्य दिनों में क्यों नहीं होता? जानें चतुर्दशी तिथि का यह गुप्त रहस्य
पितृ पक्ष में अकाल मृत्यु प्राप्त पूर्वजों के लिए चतुर्दशी श्राद्ध का विशेष महत्व है। इस दौरान श्रीमद्भागवत पुराण का ...और पढ़ें

अकाल मृत्यु के लिए पितृ पक्ष के उपाय

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पूर्वजों की पूजा, तर्पण, पिंडदान और उन्हें तृप्त करने का श्राद्ध पक्ष चल रहा है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक, पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2026) के दौरान हमारे पूर्वज पृथ्वी पर किसी न किसी रूप में आते हैं और पूरे एक पक्ष तक निवास करते हैं।
उन्हें तृप्त करने के लिए लोग जल का दान, पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध और अन्न का दान करते हैं। ऐसा करने से पूर्वज संतुष्ट होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं। जो भी लोग अच्छी-खासी उम्र पूरी करने के बाद शरीर का त्याग करते हैं, उनके लिए उनकी मृत्यु तिथि पर तर्पण और श्राद्ध कर्म जैसी परंपरा निभाई जाती है।
लेकिन जो लोग अपनी पूर्ण आयु जीने से पहले ही अल्प आयु में मृत्यु को प्राप्त हुए, उनके लिए पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2026) में एक खास तिथि का निर्धारण किया गया है। लेकिन ऐसी दिवंगत आत्माओं के लिए पितृ पक्ष में कुछ खास उपाय भी बताए गए हैं, जिससे उनकी भटकती हुई आत्मा को शांति मिल सके और ईश्वर के आशीर्वाद से मोक्ष को प्राप्त कर सकें।
अकाल मृत्यु का मतलब?
अकाल मृत्यु से तात्पर्य है कि, जो लोग अपनी आयु पूरी नहीं कर पाते हैं और अल्प आयु में ही उनका निधन हो जाता है, उसे अकाल मृत्यु कहा जाता है।
उदाहरण के तौर पर समझे तो, जब कोई व्यक्ति किसी दुर्घटना, आग, किसी गंभीर रोग, आत्महत्या के कारण अपने जीवन का अंत कर लेता है, तो वह भगवान की दी हुई आयु को पूरा नहीं कर पाता है, तो उसे ही अकाल मृत्यु कहते हैं।
अकाल मृत्यु वाले दिवंगत आत्माओं के लिए पितृ पक्ष से जुड़े उपाय
धार्मिक नियमों और मान्यताओं के मुताबिक, यदि किसी के घर में परिवार के किसी सदस्य की अकाल मृत्यु हो जाती है, तो उसे पितृ पक्ष के 15 दिनों में श्रीमद्भागवत पुराण का पाठ जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से दिवंगत आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
अकाल मृत्यु वाले पूर्वजों के लिए पितृ पक्ष में चतुर्थी तिथि निर्धारण की गई। इस तिथि पर उन पितरों का श्राद्ध या तर्पण किया जाता है, जिनकी मृत्यु किसी हादसे में हो गई थी। ज्योतिषीय मान्यताओं में चतुर्दशी तिथि भगवान शिव को समर्पित है, जिनका आशीर्वाद प्राप्त करने से दिवंगत आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस साल चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध 9 अक्तूबर 2026 को किया जाएगा।
चतुर्दशी श्राद्ध 2026 मुहूर्त और समय
चतुर्दशी तिथि आरंभ- 8 अक्तूबर 2026 को रात 10 बजकर 15 मिनट पर
चतुर्दशी तिथि समाप्त- 9 अक्तूबर को रात 09 बजकर 35 मिनट पर
चतुर्दशी श्राद्ध कुतुप मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 45 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक
रौहिणी मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 18 मिनट तक
अपराह्न काल- दोपहर 1 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर 3 बजकर 38 मिनट तक रहेगा।
चतुर्दशी श्राद्ध की विधि
चतुर्दशी श्राद्ध वाले दिन सुबह नहाने के बाद एक लोटे में गंगाजल डालकर उसमें पवित्र जल मिला लें।
इसके बाद उसमें काले तिल डालें। जिस व्यक्ति की अकाल मृत्यु हुई है, उस व्यक्ति का नाम लेते हुए भगवान शिव का जलाभिषेक करें। भगवान शिव से प्रार्थना करें कि, वे आपके परिवार के उस सदस्य को मुक्ति प्रदान करें।
दिवंगत आत्म को तर्पण देते हुए, 'ओम पितृ देवतायै नमः'मंत्र का जाप करें।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
