पितृ पक्ष के दौरान परिवार में किसी की मृत्यु हो जाए, तो क्या रोक देना चाहिए अन्य पितरों का श्राद्ध?
पितृ पक्ष के दौरान परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु होने पर सूतक लग जाता है, जिससे अन्य पूर्वजों के ...और पढ़ें

पितृ पक्ष में मृत्यु होने पर क्या करें, जानें सूतक काल के नियम (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
पितृ पक्ष में मृत्यु होने पर सूतक काल लगता है।
सूतक में अन्य पूर्वजों के श्राद्ध कर्म रोक दिए जाते हैं।
श्राद्ध कर्म तीन साल बाद पितृ मिलान पर पुनः शुरू होते हैं।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष की पूरी अवधि को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है और इस दौरान पितरों के लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। मान्यता है कि पितृ पक्ष के पूरे सोलह दिनों तक पूर्वजों का श्राद्ध करने और उन्हें जल का तर्पण करने से उनका आशीर्वाद बना रहता है।
इसी भावना से लोग पितृ पक्ष में अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी शांति के लिए कई तरह के कर्म करते हैं। कई बार ऐसा होता है कि पितृ पक्ष के दौरान ही घर में किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है और सूतक काल आरंभ हो जाता है।
ऐसे में मन में सवाल आता है कि क्या इस दौरान अन्य पूर्वजों का श्राद्ध करना चाहिए? क्या सूतक में अन्य कार्यों की तरह श्राद्ध कर्म करने की भी मनाही है? इन सवालों का जवाब जानने के लिए हमने उज्जैन के पंडित मनीष शर्मा जी से बात की। आइए आपको बताते हैं परिवार में किसी की मृत्यु होने पर श्राद्ध के नियम क्या होते हैं?
पितृ पक्ष में किसी की मृत्यु होने पर लग जाता है सूतक
गरुड़ पुराण की मानें तो जैसे ही परिवार में किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो घर में सूतक लग जाता है। सूतक की अवधि में कई तरह के शुभ और धार्मिक कार्यों को रोकने की परंपरा है। इसी वजह से अगर पहले से श्राद्ध कर्म किए जा रहे हैं और पूर्वजों के लिए तर्पण किया जा रहा है, तो सूतक लगते ही इन कर्मों पर रोक लगा देनी चाहिए।
सूतक काल में जिस तरह से पूजा-पाठ नहीं किया जाता है उसी तरह से श्राद्ध कर्म को पूर्वजों की पूजा माना जाता है और सूतक में ये कर्म करने से भी मना किया जाता है।
तीन साल तक घर में नहीं होते श्राद्ध कर्म
पितृ पक्ष या कभी भी यदि परिवार में किसी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके तुरंत बाद श्राद्ध कर्म नहीं होते हैं। तीसरे साल जब मृत पूर्वजों का पितृ मिलान किया जाता है और पवित्र नदी के पास पिंड दान कर दिया जाता है उसके बाद फिर से श्राद्ध कर्म शुरू हो जाते हैं।
इसी वजह से ऐसी मान्यता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद तीन वर्ष का समय पूरा होने के बाद पितरों का मिलान करने की प्रक्रिया विधि-विधान से होती है और उसके बाद से सभी पूर्वजों का श्राद्ध पुनः आरंभ होता है।
परिवार में किसी ही मृत्यु हो जाए तो क्या करें?
अगर पितृ पक्ष के दौरान परिवार में किसी की मृत्यु हो जाए, तो सबसे पहले मृत्यु से जुड़े संस्कार और सूतक संबंधी नियमों का पालन करना चाहिए। उस दौरान आपको अन्य पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म, पिंड दान, तर्पण आदि सभी कामों को रोक देना चाहिए। इस दौरान किए जाने वाले पंचबलि कर्म को भी रोक देना चाहिए और सूतक के नियमों का ध्यान रखते हुए कोई काम करने चाहिए।
पितृ पक्ष पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म करने का समय माना जाता है, लेकिन यदि इस दौरान सूतक लग जाए तो आपको पूर्वजों का श्राद्ध कर्म रोक देना चाहिए।
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