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पितृ पक्ष में महाभरणी श्राद्ध क्यों है खास? गयाजी जितना फल और यमराज से जुड़ा है अनोखा रहस्य

Published: Mon, 28 Sep 2026 06:15 PM (IST)

पितृ पक्ष 26 सितंबर 2026 से शुरू हो चुका है, जिसमें 29 सितंबर 2026 को महाभरणी श्राद्ध मनाया जाएगा। यह ...और पढ़ें

महा भरणी श्राद्ध अनुष्ठान

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 26 सितंबर 2026, शनिवार से पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2026) की शुरुआत हो चुकी है, जो 10 अक्तूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के मौके पर समाप्त होगी। हिंदू धर्म में पितरों को समर्पित यह पखवाड़ा अत्यंत खास और धार्मिक अनुष्ठान के लिए जरूरी माना जाता है।

29 सितंबर 2026, मंगलवार को श्राद्ध पक्ष का तीसरा दिन यानी 'महाभरणी श्राद्ध' है। महाभरणी श्राद्ध या (Maha Bharani Shraddha 2026) भरणी श्राद्ध महालया पितृ पक्ष के दौरान उन दिवंगत आत्माओं को समर्पित होता है, जिनकी मृत्यु भरणी नक्षत्र के दौरान हुई हो। महाभरणी श्राद्ध इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि भरणी नक्षत्र के स्वामी खुद भगवान यम हैं।

महा भरणी श्राद्ध का महत्व

भरणी श्राद्ध और अन्य तरह की श्राद्ध पूजा का महत्व अग्नि पुराण, मत्स्य पुराण और गरुड़ पुराण जैसे कई हिंदू पुराणों में वर्णित है। हिंदू धर्म शास्त्रों के मुताबिक, भरणी श्राद्ध में प्राप्त होने वाला फल गया श्रद्धा की ही तरह हैं।

माना जाता है कि, पितृ पक्ष के दौरान पितरों का पिंडदान दोपहर में करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा भरणी श्राद्ध के लिए कुटुप मुहूर्त या रोहिणी मुहूर्त का समय भी बेहद प्रभावी माना जाता है।

महाभरणी श्राद्ध 2026 मुहूर्त

महा भरणी श्राद्ध 29 सितंबर 2026, मंगलवार
भरणी नक्षत्र आरंभ 29 सितंबर 2026 को सुबह 9 बजकर 3 मिनट पर
भरणी नक्षत्र समापन 30 सितंबर 2026, सुबह 7 बजकर 36 मिनट पर
कुतुप मुहूर्त सुबह 11 बजकर 47 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक
रोहिणी मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से दोपहर 1 बजकर 23 मिनट तक
अपराह्न काल दोपहर 1 बजकर 23 मिनट से दोपहर 3 बजकर 46 मिनट तक

भरणी नक्षत्र श्राद्ध आमतौर व्यक्ति की मृत्यु के बाद एक बार किया जाता है। हालांकि पवित्र धार्मिक ग्रंथ 'धर्मसिंधु' के मुताबिक भरणी श्राद्ध हर वर्ष किया जा सकता है। पितृ पक्ष में यह अनुष्ठान अत्यंत शुभ माना जाता है, इसलिए इसे करने वाले व्यक्ति को इसकी पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए।

महा भरणी श्राद्ध किसे करना चाहिए?

पितृ पक्ष के दौरान महा भरणी श्राद्ध आमतौर पर मृतक के पुत्र या परिवार के किसी पुरुष सदस्य को ही करना चाहिए। इसके अलावा यह श्राद्ध उन्हें भी करना चाहिए, जिनके पूर्वज अपने जीवनकाल में गया, प्रयाग या अन्य किसी धार्मिक तीर्थ पर नहीं जा सके, तो उनकी शांति के लिए यह अनुष्ठान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भरणी श्राद्ध दिवंगत आत्मा के लिए लाभकारी माना जाता है।

महा भरणी श्राद्ध कैसे करें?

महा भरणी श्राद्ध की विधि किसी भी श्राद्ध की तरह हैं। सुबह जल्दी स्नान करने के बाद, दक्षिणमुखी जल, तिल और कुश घास से तर्पण, पिंडदान और पूर्वजों के लिए भोजन तैयार करना जिसे एक ब्राह्मण, एक गाय, एक कुत्ते और कौवों के साथ बांटा जाता है।

भरणी श्राद्ध करने से व्यक्ति को सेहत, समृद्धि, मानसिक शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पितृ खुश होने के साथ वंश पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। भरणी श्राद्ध सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि यह अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता जाहिर करने का भी माध्यम है। विधि-विधान से भरणी श्राद्ध पर पितरों का पिंडदान करने से पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है।

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