पितरों की तृप्ति से जुड़ा है पंचबलि कर्म, पितृ पक्ष में क्यों किया जाता है यह अनुष्ठान?
पितृ पक्ष में पूर्वजों की तृप्ति और आशीर्वाद के लिए पंचबलि कर्म का विशेष महत्व है। इस अनुष्ठान में गाय, ...और पढ़ें

पितृ पक्ष में पंचबलि कर्म का महत्व और इसे करने की विधि (Picture Credit: AI Generated)
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पितृ पक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पंचबलि कर्म।
गाय, कौआ, कुत्ता, देवता और चींटी को भोजन अर्पित किया जाता है।
यह कर्म पितृ दोष से मुक्ति दिलाकर पूर्वजों का आशीर्वाद दिलाता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भाद्रपद पूर्णिमा के दिन से आरंभ होने वाले पितृ पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या के साथ होता है। इन सोलह दिनों में लोग पूर्वजों के निमित्त कई तरह के कर्म करते हैं जिससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है और वंशजों पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।
इन सभी दिनों में पूर्वजों का तर्पण और श्राद्ध किया जाता है। इस कर्म का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व होता है। इस अवधि में तर्पण करने से मृत आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद मिलता है। श्राद्ध के दौरान किए जाने वाले अनुष्ठानों में से एक पंचबली कर्म भी है, जो पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए जरूरी माना जाता है।
पितृ पक्ष के दौरान पंचबलि कर्म को तर्पण और श्राद्ध से ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। आइए जानें क्या है यह पंचबलि कर्म और इसका महत्व क्या है?
पंचबली कर्म क्या होता है?
पंचबलि कर्म सदियों से चला आ रहा एक ऐसा अनुष्ठान है जो श्राद्ध पक्ष के दौरान किया जाता है। पंचबलि शब्द संस्कृत के दो शब्दों से लिया गया है- पंच जिसका अर्थ है 'पांच' और 'बलि' जिसका अर्थ है किसी को भेंट चढ़ाना। श्राध्द के दौरान पांच अलग-अलग स्थानों पर भोजन रखा जाता है जो अलग जीवों को समर्पित होते हैं।
ऐसा कहा जाता है कि हमारे पूर्वज इन पशुओं के माध्यम से ही भोजन ग्रहण करते हैं और उनकी आत्मा को तृप्ति मिलती है। पंचबलि कर्म में गाय, कौआ, कुत्ता, देवता और चींटी को भोजन दिया जाता है।
कैसे किया जाता है पंचबलि कर्म?
पितृ पक्ष के दौरान पितरों को भोजन कुछ जीव-जंतुओं के माध्यम से मिलता है और इन्हें पूर्वजों का संदेशवाहक भी माना जाता है। श्राद्ध कर्म के दौरान पंचबलि निकालने के बाद ही ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है। पंचबलि के लिए घर के अलग-अलग पांच स्थानों पर जो भी भोजन बनता है उसे रखा जाता है। और उसके आस पास जल छिड़का जाता है।
पंचबलि कर्म में किसके लिए निकलता है भोजन?
गौ ग्रास- पंचबलि कर्म में सबसे पहले गोबलि यानी कि गाय के लिए ग्रास निकाला जाता है। इसे अत्यंत शुभ कर्म माना जाता है क्योंकि गाय में 33 करोड़ देवी-देवता मौजूद होते हैं और श्राद्ध में गाय को भोजन कराने से देवों के साथ पूर्वजों का आशीर्वाद भी मिलता है।
कौआ- पंचबलि कर्म में दूसरी बलि कौए को दी जाती है और मान्यता है कि कौवा यम में विराजमान पक्षी होता है इसलिए श्राद्ध के दौरान अन्न का एक अंश इसे भी दिया जाता है। इससे भोजन पूर्वजों को मिलता है।
श्वान बलि- पंचबलि में तीसरी बलि श्वान यानी कुत्ते को दी जाती है। इसमें कुत्ते के लिए भोजन निकाला जाता है। मान्यता है कि कुत्ता एक ऐसा जीव होता है जिसे यम का पशु माना जाता है।
देवता- पंचबलि की चौथी बलि देवताओं के लिए होती है। पितृ पक्ष के दौरान देवताओं का स्थान पूर्वजों के बाद आता है, इसलिए उन्हें भोजन अर्पित करने से एक साथ पूर्वजों और डिवॉन दोनों का आशीर्वाद मिलता है।
चींटी- पंचबलि की पांचवीं बलि पिपीलिका यानी चींटी को दी जाती है और इसे पूर्वजों का संदेशवाहक माना जाता है।
पितृ पक्ष में पंचबली कर्म को विशेष स्थान दिया गया है, क्योंकि इसे करने से घर में किसी तरह का पितृ दोष नहीं लगता है और पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है।
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