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मातृ नवमी से लेकर अकाल मृत्यु तक: पितृ पक्ष की किस तिथि पर किसका श्राद्ध करें? देखें पूरी लिस्ट

Published: Sat, 26 Sep 2026 11:52 AM (IST)

पितृ पक्ष में किस तिथि पर किसका श्राद्ध करना चाहिए, इसकी विस्तृत जानकारी दी गई है। इसमें पूर्णिमा श्राद्ध से ...और पढ़ें

किस दिन करें किसका श्राद्ध? (Picture Credit: AI Generated)

किस दिन करें किसका श्राद्ध? (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा।

  2. मातृ नवमी पर सुहागिन महिलाओं का श्राद्ध किया जाता है।

  3. अकाल मृत्यु और अज्ञात तिथि के लिए विशेष श्राद्ध तिथियां।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष की शुरुआत आज यानी 26 सितंबर से हुई है और इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। इस दौरान पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। मान्यता है कि इससे पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है और पितृ दोष दूर होता है।

शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान व्यक्ति का श्राद्ध उसी तिथि को किया जाता है, जिस तिथि पर उसकी मृत्यु हुई हो। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों और विशेष लोगों के लिए अलग-अलग तिथियां भी तय की गई हैं। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि किस तिथि पर किसका श्राद्ध किया जाना चाहिए।

पितृ पक्ष में किस तिथि पर किसका श्राद्ध करें

पूर्णिमा श्राद्ध- इस दिन उनका श्राद्ध करने का विधान है, जिनकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई हो। पूर्णिमा श्राद्ध को प्रोष्ठपदी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

प्रतिपदा- इस तिथि पर उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु प्रतिपदा के दिन हुई हो। इसके अलावा, नाना-नानी का श्राद्ध भी इसी दिन किया जाता है।

द्वितीया, तृतीया और चतुर्थी- जिन लोगों की मृत्यु इन तिथियों पर हुई हो, उनका श्राद्ध इन्हीं दिनों किया जाता है।

पंचमी- जिन लोगों की मृत्यु अविवाहित (कुंवारे) अवस्था में हुई हो, उनका श्राद्ध पंचमी तिथि पर किया जाता है।

षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी- इन तिथियों पर उनका श्राद्ध करने का विधान है, जिनकी मृत्यु इन तिथियों पर हुई हो।

नवमी तिथि (मातृ नवमी)- नौवीं तिथि के श्राद्ध को मातृ नवमी कहा जाता है। अगर किसी सुहागिन महिला (जैसे- माता, दादी, नानी) की मृत्यु पति के जीवित रहते हुई हो, तो उनका श्राद्ध मातृ नवमी के दिन ही करना शुभ माना जाता है।

दशमी और एकादशी तिथि- जिन लोगों की मृत्यु दशमी या एकादशी तिथि को हुई हो, उनका श्राद्ध इन्हीं दिनों किया जाता है।

द्वादशी तिथि- जिनकी मृत्यु द्वादशी को हुई हो, उनका श्राद्ध इस दिन होता है। इसके अलावा,जिन पूर्वजों ने संन्यास ले लिया था, उनका श्राद्ध भी विशेष रूप से द्वादशी तिथि पर ही किया जाता है।

त्रयोदशी तिथि- जिन बच्चों की मृत्यु कम उम्र में हो गई हो, उनका श्राद्ध त्रयोदशी तिथि पर करना चाहिए।

चतुर्दशी तिथि- इस तिथि पर ऐसे लोगों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो। सामान्य मृत्यु वालों का श्राद्ध इस दिन नहीं किया जाता।

सर्वपितृ अमावस्या- यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है। अगर आपको अपने पूर्वजों की मृत्यु की तिथि याद नहीं है, या किसी कारणवश आप निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं कर पाए, तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन उनका श्राद्ध किया जा सकता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।