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नरक चतुर्दशी और मां काली पूजा का क्या है नाता? नरकासुर के जन्म और 16,100 कन्याओं को बंदी बनाने का रहस्य

Published: Fri, 06 Nov 2026 04:00 PM (IST)

नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली और रूप चतुर्दशी भी कहते हैं, जो भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की याद ...और पढ़ें

नरक चतुर्दशी और मां काली पूजा का संबंध: नरकासुर की कहानी (Picture Credit: AI Generated)

नरक चतुर्दशी और मां काली पूजा का संबंध: नरकासुर की कहानी (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली और रूप चतुर्दशी भी कहते हैं।

  2. भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर 16,100 कन्याओं को बचाया।

  3. मां काली पूजा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इसे छोटी दिवाली और रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। मुख्य रूप से इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर का वध किए जाने की कथा प्रचलित है।

वहीं, इसी दिन कई स्थानों पर मां काली की पूजा भी विशेष श्रद्धा के साथ की जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि नरक चतुर्दशी और मां काली पूजा का आपस में क्या संबंध है? यही नहीं एक सवाल यह भी आता है कि नरकासुर कौन था जिसका वध श्री कृष्ण ने किया था और उसके उपलक्ष में छोटी दीवाली मनाई जाने लगी? आखिर नरकासुर कौन था और उसने 16,100 कन्याओं को बंदी क्यों बनाया था? यही नहीं क्या वह पृथ्वी का पुत्र था? आइए आपको बताते हैं इनसे जुड़े कुछ रोचक रहस्यों के बारे में।

कैसे हुआ था नरकासुर का जन्म? 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, नरकासुर का जन्म भगवान विष्णु के वराह अवतार और पृथ्वी देवी यानी भूदेवी से हुआ था। इसी वजह से उसे भौमासुर भी कहा जाता है। इसके बारे में यह कथा प्रचलित है कि जब भगवान विष्णु ने वराह अवतार धारण करके हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी को समुद्र की गहराइयों से बाहर निकाला, तब भूदेवी और भगवान विष्णु के मिलन से नरकासुर का जन्म हुआ।

भौमासुर में 'भौम' का अर्थ पृथ्वी से उत्पन्न होना है। इसी वजह से उसे पृथ्वी का पुत्र कहा जाता है। उसने ब्रह्माजी की घोर तपस्या से वर प्राप्त किया कि उसे कोई देव-दानव-मनुष्य कोई नहीं मार सकेगा। कुछ दिनों तक तो नरकासुर अच्छे से राज्य करता रहा, लेकिन समय के साथ उसके भीतर घमंड बढ़ने लगा। शक्ति के मद में चूर होकर उसने देवताओं, ऋषियों और मनुष्यों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया। उस समय उसका अंत निश्चित हो गया।

नरकासुर ने 16,100 कन्याओं को बंदी क्यों बनाया था?

पौराणिक कथा के अनुसार, नरकासुर ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने और अपने अत्याचारों को बढ़ाने के लिए 16,100 कन्याओं का अपहरण कर उन्हें बंदी बना लिया था। उसने इन कन्याओं को अपने महल में कैद कर रखा था। इस घटना से देवता और मनुष्य सभी परेशान हो गए थे।

नरकासुर के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ नरकासुर के राज्य पहुंचे। वहां दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। नरकासुर को वरदान प्राप्त था कि उसकी मृत्यु उसकी माता के हाथों ही होगी। सत्यभामा को भूदेवी का अवतार माना जाता है। इसलिए युद्ध के दौरान सत्यभामा ने नरकासुर का वध कर दिया।

नरक चतुर्दशी और मां काली पूजा का क्या है संबंध?

नरक चतुर्दशी और मां काली पूजा दोनों का संबंध बुराई के अंत, शक्ति और अंधकार पर प्रकाश की विजय की धार्मिक भावना से जोड़ा जाता है। नरक चतुर्दशी भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की याद में मनाई जाती है। वहीं, दीपावली की अमावस्या पर मां काली की पूजा की जाती है।

मां काली को दुष्ट शक्तियों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। विशेष रूप से बंगाल में दीपावली के दिन काली पूजा का बहुत महत्व है। इस दिन भक्त मां काली की प्रतिमा स्थापित करके विधि-विधान से पूजा करते हैं और उनसे साहस, सुरक्षा तथा सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। अगर हम इन दोनों पर्वों की बात करें, तो ये दोनों ही पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाए जाते हैं।

नरकासुर का अंत और माता काली का पूजन करने वाली काली चौदस आपस में इसलिए संबंधित हैं, क्योंकि इनकी तिथियां हिंदू पंचाग के अनुसार एक ही होती हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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