पहली बार कर रहे हैं मातृ नवमी का श्राद्ध? 90% लोग करते हैं ये भूल, तुरंत नोट करें ये 5 बातें!
मातृ नवमी का श्राद्ध विशेष रूप से दिवंगत महिलाओं को समर्पित है, जो इस साल 4 अक्टूबर को है। पहली ...और पढ़ें

मातृ नवमी श्राद्ध: इन 5 बातों का रखें ध्यान (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
मातृ नवमी श्राद्ध दिवंगत महिलाओं को समर्पित होता है।
पंचबलि कर्म और तुलसी पूजन अवश्य करना चाहिए।
कुतुप मुहूर्त में श्राद्ध करना विशेष फलदायी माना जाता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पितृ पक्ष के सोलह दिनों में से एक होता है नवमी तिथि का श्राद्ध, जो मृत महिलाओं को समर्पित होता है। हर साल अश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मातृ नवमी के रूप में मनाया जाता है।
इस दिन घर की महिलाएं मुख्य रूप से महिला पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए कार्य करती हैं और उनके नाम से तर्पण और पिंड दान करती हैं।
इस तिथि को सौभाग्यवती श्राद्ध तिथि भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन उन दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध भी होता है जिनकी मृत्यु सुहागिन स्थिति में हुई है। इस साल यह तिथि 04 अक्टूबर को पड़ेगी और इस दिन यदि कोई पहली बार दिवंगत स्त्रियों का श्राद्ध करने जा रहा है, तो उसे कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिससे पूर्वजों का पूर्ण आशीर्वाद मिले और घर में खुशहाली बनी रहे।
पंचबलि कर्म है जरूरी
अगर आप ऐसी महिला का श्राद्ध कर रहे हैं जिनकी मृत्यु सुहागिन स्थिति में हुई है उनके लिए आपको मातृ नवमी तिथि के दिन पंचबलि कर्म करना चाहिए। इसमें आप पांच जगह भोजन किसी बरगद के पत्ते में निकालें और गाय, कौए, कुत्ते, चींटी और देवताओं को अर्पित करें।
यह कर्म वैसे किसी भी श्राद्ध की पूर्णता के लिए जरूरी है, लेकिन कई लोग इसे मातृ नवमी पर करना भूल जाते हैं। अगर आप पहली बार श्राद्ध कर रहे हैं, तो इस बात का ध्यान रखना जरूरी है।
तुलसी पूजन जरूर करें
मातृ नवमी के दिन तुलसी का पूजन करना जरूरी माना जाता है। इस दिन तुलसी की पूजा करने के साथ उन्हें सुहाग की सामग्री जरूर अर्पित करें। ऐसा करने से सभी पूर्वजों की कृपा बनी रहती है और श्राद्ध का पूर्ण फल भी मिलता है।
सुहागिन महिला को श्रृंगार की सामग्री दान करें
जब किसी सुहागिन मृत पूर्वज का श्राद्ध किया जाता है तब मातृ नवमी तिथि के दिन आपको किसी ब्राह्मणी या जरूरतमंद स्त्री को श्रृंगार की सामग्री का दान जरूर करना चाहिए। इससे श्राद्ध पूर्ण रूप से स्वीकार्य माना जाता है। सुहाग के सामान में आप लाल साड़ी, कुमकुम, सिंदूर, चूड़ी, बिछिया आदि सामग्रियों का दान करना चाहिए।
कुतूप मुहूर्त में करें श्राद्ध
अगर आप पहली बार मातृ नवमी का श्राद्ध कर रहे हैं, तो आपको इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त सबसे अच्छा है और मुख्य रूप से महिलाओं का श्राद्ध इसी मुहूर्त में करें जिससे आपको पूर्ण फल प्राप्त हो सकें। इस मुहूर्त में आप दोनों हाथों की अंजुलियों में जल लें और पूर्वजों के नाम का स्मरण करते हुए तर्पण करें। जल में काले टिल जरूर होने चाहिए।
गोबर के उपले से करें हवन
मातृ नवमी के दिन सभी दिवंगत महिलाओं को पृथ्वी से विदा किया जाता है, इसलिए इस दिन गाय के गोबर के उपले से हवन करें और उसमें खीर और पूड़ी के पांच टुकड़े डालकर जलाएं। ऐसा माना जाता है कि भोजन उपले के धुंए से ही पूर्वजों तक भोजन जाता है और उनका आर्शीवाद मिलता है।
अगर आप भी पहली बार मातृ नवमी में श्राद्ध करने जा रहे हैं, तो यहां बताई बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है।
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