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4 या 5 अक्टूबर, मातृ नवमी कब है? सही तारीख के साथ महिला पूर्वजों के श्राद्ध की विधि

Published: Mon, 28 Sep 2026 08:00 AM (IST)

मातृ नवमी पितृ पक्ष में महिला पूर्वजों के श्राद्ध के लिए समर्पित है। इस दिन दिवंगत महिलाओं की आत्मा की ...और पढ़ें

मातृ नवमी 2026: जानें सही तिथि और महिला पूर्वजों के श्राद्ध की संपूर्ण विधि (Picture Credit: AI Genrated)

मातृ नवमी 2026: जानें सही तिथि और महिला पूर्वजों के श्राद्ध की संपूर्ण विधि (Picture Credit: AI Genrated)

HighLights

  1. मातृ नवमी 2026 में 4 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी।

  2. यह तिथि महिला पूर्वजों के श्राद्ध और तर्पण के लिए है।

  3. श्राद्ध कर्म से आत्मा को मुक्ति और वंशजों को आशीर्वाद मिलता है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को 'मातृ नवमी' कहा जाता है। यह तिथि पितृ पक्ष की पावन अवधि में पड़ती है और इस दौरान सभी महिला पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है।

जिस प्रकार से बेटे अपने पिता और पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण करते हैं, उसी तरह से इस दिन घर की बहुएं दिवंगत महिला पूर्वजों का श्राद्ध विधि-विधान से करती हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। इस दिन श्राद्ध के साथ दान पुण्य करने का भी विधान है।

जिन विवाहित महिलाओं की मृत्यु नवमी तिथि को हुई हो या जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात न हो, उनका श्राद्ध भी इसी दिन किया जाता है। मातृ नवमी, को सभी मृत महिलाओं का श्राद्ध करने के लिए एक विशेष दिन माना जाता है। आइए आपको बताते हैं इस साल पितृ पक्ष में कब पड़ेगी यह तिथि और किस विधि से श्राद्ध करना शुभ माना जाता है?

मातृ नवमी 2026 कब है?

इस साल मातृ नवमी 04 अक्टूबर, रविवार को पड़ेगी और इसी दिन सभी मृत महिला पूर्वजों का श्राद्ध करना शुभ होगा।

  • नवमी तिथि आरंभ - 04अक्टूबर, रविवार को प्रातः 05:51 बजे
  • नवमी तिथि समाप्त - 05 अक्टूबर, सोमवार प्रातः 03:53 बजे तक
  • उदया तिथि के अनुसार मातृ नवमी 04 अक्टूबर को ही मनाई जाएगी।
  • मातृ नवमी कुतुप मूहूर्त - प्रातः 11:46 से दोपहर 12:33 तक, इस दिन श्राद्ध के लिए 47 मिनट की अवधि शुभ मानी जा रही है।
  • रौहिण मूहूर्त - दोपहर 12:33 से दोपहर 01:20 तक

मातृ नवमी का श्राद्ध करने की विधि

  • इस दिन प्रातः जल्दी उठाकर सभी दिवंगत महिलाओं का आह्वाहन किया जाता है और उनके लिए श्राद्ध कर्म का संकल्प लिया जाता है।
  • महिला पूर्वजों के लिए तर्पण में काले तिल और सफेद पुष्पों को लेकर उनके लिए तरपान किया जाता है। यह कर्म मुख्य रूप से घर की बहू या अन्य कोई स्त्री करती है।
  • इस दिन चावल या जौ के आटे से पिंड बनाए जाते हैं और इसे घी के मिश्रण में दूध और चीनी भी मिलाकर भी बनाया जाता है।
  • पिंडदान के साथ जल का तर्पण किया जाता है और पूर्वजों को याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की जाती है।
  • इस दिन पंचबलि भोग निकला जाता है और माता की पसंद का भोजन तैयार करके ब्राह्मणी को भोज कराया जाता है।
  • यदि दिवंगत महिला सुहागिन थी, तो दान में श्रृंगार की चीजें दी जाती हैं।
  • गोबर के उपले से हवन करते हुए मृत महिलाओं की विदाई की जाती है और उनकी मुक्ति की प्रार्थना की जाती है। साथ ही घर की समृद्धि की कामना की जाती है।

मातृ नवमी का महत्व

नवमी श्राद्ध तिथि को 'मातृ नवमी' भी कहा जाता है। महिलाओं का श्राद्ध करने के लिए यह तिथि सबसे उपयुक्त मानी जाती है। परिवार की उन सभी दिवंगत महिला सदस्यों को प्रसन्न करने के लिए नवमी तिथि पर श्राद्ध किया जाता है, जिनका निधन शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि में हुआ है याकिसी भी तिथि में हुआ है। इस दिन समस्त मृत महिला पूर्वजों का श्राद्ध करके उन्हें पृथ्वी लोक से विदा किया जाता है।

अगर यहां बताई विधि से महिला पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है तो उनकी आत्मा को मुक्ति मिलती है और वंशजों पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।

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