Masik Krishna Janmashtami 2025: इस तरह करें लड्डू गोपाल की पूजा, कृपा बरसाएंगे मुरलीधर
पंचांग के अनुसार मासिक कृष्ण जन्माष्टमी (Masik Krishna Janmashtami 2025) हर माह में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाई जाती है। इस दिन पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपा जी की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। इससे साधक के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। ऐसे में चलिए पढ़ते हैं कि आप किस तरह मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की पूजा कर सकते हैं।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पंचांग के अनुसार, वैशाख माह की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत गुरुवार, 20 अप्रैल को किया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त रात 12 बजकर 13 मिनट से रात 12 बजकर 59 मिनट तक रहने वाला है। माना जाता है कि जो साधक श्रद्धाभाव से मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं लड्डू गोपाल जी की पूजा विधि, प्रिय भोग और मंत्र।
इस तरह करें पूजा
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाएं। इसके बाद घंटी बजाकर लड्डू गोपाल को उठाएं। अब लड्डू गोपाल को स्नान करवाएं और साफ-सुथरे कपड़े पहनाएं। स्नान कराने के बाद लड्डू गोपाल को चंदन का तिलक लगाएं और उनका शृंगार करें। लड्डू गोपाल जी के भोग में तुलसी का पत्ता जरूर डालें। अंत में मंत्रों व आरती का पाठ करें।
लगाएं इन चीजों का भोग
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर लड्डू गोपाल को खीर, पंचामृत, माखन-मिश्री आदि का भोग लगा सकते हैं। यह सभी भोग उन्हें बेहद प्रिय माने गए हैं। तुलसी में तुलसी का पत्ता शामिल करना न भूलें, क्योंकि इसके बिना लड्डू गोपाल का भोग अधूरा मान जाता है। इसके साथ ही आप भोग लगाते समय इस मंत्र का जप कर सकते हैं। कहा जाता है कि ऐसा करने से भगवान भोग को जल्दी स्वीकार करते हैं -
' त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाणे सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।
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(Picture Credit: Freepik) (AI Image)
भगवान कृष्ण के मंत्र -
- ॐ कृष्णाय नमः
- ॐ नमो भगवते श्री गोविन्दाय
- ॐ देव्किनन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात
- ओम क्लीम कृष्णाय नमः
- गोकुल नाथाय नमः
- ॐ श्री कृष्णः शरणं ममः
- हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।।
- ॐ नमो भगवते तस्मै कृष्णाया कुण्ठमेधसे। सर्वव्याधि विनाशाय प्रभो माममृतं कृधि।।
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