Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर क्यों खाई जाती है खिचड़ी? जानें इसका धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे 'खिचड़ी' भी कहते हैं। इस दिन भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। इस दिन खिचड़ी बनाने, खाने व दान क ...और पढ़ें

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का महत्व।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का पर्व बेहद शुभ माना जाता है। यह भगवान सूर्य की पूजा और दान-पुण्य के लिए समर्पित है। इस साल यह पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इसे 'खिचड़ी' के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन घर-घर में खिचड़ी बनाई जाती है और भगवान को इसका भोग लगाया जाता है। साथ ही इसका दान भी किया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतने बड़े पर्व (Makar Sankranti 2026) पर खिचड़ी का ही इतना महत्व क्यों है? तो आइए इसके पीछे की पौराणिक कथा और इसके महत्व के बारे में जाने जाते हैं।

बाबा गोरखनाथ से जुड़ी पौराणिक कथा (Why Eat Khichdi On Makar Sankranti)
ऐसा कहा जाता है कि मकर संक्रांति (Religious Meaning Makar Sankranti) पर खिचड़ी खाने की परंपरा की शुरुआत बाबा गोरखनाथ ने की थी। पौराणिक कथा के अनुसार, खिलजी के आक्रमण के समय युद्ध में भारत के कई वीर योद्धा और योगी भी शामिल थे। चारों तरफ लड़ाई-झगड़े का माहौल था। तब उनके पास भोजन बनाने का समय नहीं होता था और वे अक्सर भूखे रह जाते थे, जिस कारण उनकी शक्ति कम हो रही थी।
उनकी शक्ति को कम होते देखकर बाबा गोरखनाथ ने दाल, चावल और सब्जियों को एक साथ मिलाकर पकाने की सलाह दी। यह व्यंजन तैयार करने में बेहद आसान, स्वादिष्ट और तुरंत ऊर्जा देने वाला था। बाबा गोरखनाथ ने इस व्यंजन का नाम 'खिचड़ी' रखा। तभी से मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने और खाने की परंपरा शुरू हो गई। आज भी गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर में मकर संक्रांति पर खिचड़ी का भव्य मेला लगता है।
लाभ (Makar Sankranti Khichdi Tradition Benefits)
माना जाता है कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने से ग्रहों के शुभ प्रभाव हमारे शरीर और जीवन पर पड़ते हैं। मकर संक्रांति पर सूर्य अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं, इसलिए इस दिन शनि देव को प्रसन्न करने के लिए उड़द दाल की खिचड़ी बनाई जाती है। इसे शुभता का प्रतीक माना जाता है।
खिचड़ी दान का महत्व (Makar Sankranti Khichdi Tradition Significance)
इस दिन केवल खिचड़ी खाना ही जरूरी नहीं है, बल्कि कच्ची खिचड़ी दान करना भी महादान माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस पावन पर्व खिचड़ी का दान करने से घर में अन्न और धन के भंडार कभी खाली नहीं होते हैं।
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