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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 02, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Mahalaya 2024: क्यों मनाया जाता है महालया अमावस्या का पर्व? इन उपाय से मां दुर्गा होंगी प्रसन्न

Published: Wed, 02 Oct 2024 10:24 AM (IST)

सनातन धर्म में पितृ पक्ष को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मत है कि पितृ पक्ष के दौरान स्नान-ध्यान ...और पढ़ें

Mahalaya 2024: महालया अमावस्या का धार्मिक महत्व
Mahalaya 2024: महालया अमावस्या का धार्मिक महत्व

HighLights

  1. महालया का पर्व आज मनाया जा रहा है।
  2. इसे देशभर में उत्साह के साथ मनाया जाता है।
  3. इसके समापन के बाद शारदीय नवरात्र शुरू होते हैं।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पितृ पक्ष की अवधि को पितरों को प्रसन्न करने के लिए उत्तम  माना जाता है। इस वर्ष पितृ पक्ष की शुरुआत 18 सितंबर से हुई थी, जिसका समापन आज यानी 02 अक्टूबर को है। पितृ पक्ष के आखिरी दिन को सर्वपितृ अमावस्या के नाम से जाता है। साथ ही इसी दिन महालया का पर्व भी मनाया जाता है। सनातन शास्त्रों में इस तिथि को खास माना जाता है, क्योंकि इस शुभ दिन पर मां दुर्गा धरती पर आगमन के लिए कैलाश पर्वत से विदा लेती हैं। ऐसे में आइए इस लेख में जानते हैं कि क्यों मनाया जाता है महालया अमावस्या (Kab hai Mahalaya Amavasya 2024) का पर्व और इस दिन किए जाने वाले उपाय के बारे में।  

कब है महालया (Mahalaya 2024 Date)

पंचांग के अनुसार, आश्विन माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 01 अक्टूबर को रात्रि 09 बजकर 39 मिनट पर हो गई है। वहीं, इसका समापन 03 अक्टूबर को रात्रि 12 बजकर 18 मिनट पर होगा। ऐसे में आज यानी 02 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या और महालया का पर्व मनाया जा रहा है।

महालया अमावस्या पूजा मुहूर्त 2024 (Mahalaya Amavasya 2024 puja Timing)

कुतुप मुहूर्त - सुबह 11 बजकर 46 मिनट से 12 लेकर 34 मिनट तक।

रौहिण मुहूर्त - दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से लेकर से 01 बजकर 21 मिनट तक।  

अपराह्न काल- दोपहर 01 बजकर 21 से लेकर 03 बजकर 43 मिनट तक।

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इसलिए मनाते हैं महालया अमावस्या (Mahalaya Amavasya Significance)

महालया अमावस्या के दिन पितरों का विधिपूर्वक श्राद्ध किया जाता है। इसके अलावा पितरों का तर्पण और पिंडदान भी किया जाता है। मान्यता है कि इन कार्यों को करने से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। तर्पण करने से जातक के जीवन में खुशियों के जीवन में आगमन होता है। इसके अलावा लोगों को अन्न, धन और वस्त्र का दान करने से मां दुर्गा और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।  

सर्वपितृ अमावस्या के दिन करें ये उपाय

पितरों की पूजा करें और गरीब लोगों को भोजन खिलाएं। उनसे जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें। मान्यता है कि इससे पूर्वज प्रसन्न होंगे और हमेशा उनका आशीर्वाद बना रहेगा।  

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।'