समुद्र मंथन से जुड़ा है मां लक्ष्मी और कमल का नाता, यहां समझें देवी को क्यों चढ़ाते हैं यह फूल?
महालक्ष्मी व्रत के दौरान मां लक्ष्मी को कमल का फूल चढ़ाने का महत्व बताया गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ...और पढ़ें
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मां लक्ष्मी को प्रिय है कमल का फूल (AI-generated Image)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महालक्ष्मी व्रत (Mahalaxmi Vrat 2026) को धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। यह व्रत 16 दिनों तक किया जाता है। इस दौरान मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना और व्रत करने का विशेष महत्व है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को सच्चे मन से करने पर धन, ऐश्वर्य, समृद्धि और सुख-शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है और देवी की कृपा से शुभ परिणाम मिलते हैं। महालक्ष्मी व्रत की पूजा के दौरान देवी को कमल का फूल चढ़ाया जाता है, जिसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि आखिर मां लक्ष्मी को कमल का फूल क्यों अर्पित किया जाता है। आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इसके पीछे की वजह के बारे में।
क्यों प्रिय है मां लक्ष्मी को कमल का फूल?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के द्वारा समुद्र मंथन किया गया था, तो उस दौरान कई रत्नों के साथ मां लक्ष्मी कमल के पर विराजमान होकर ही प्रकट हुई थीं। इसी वजह मां लक्ष्मी का प्रिय फूल कमल माना जाता है। इसी कारण से कमल को मां लक्ष्मी का प्रिय फूल माना जाता है।
पूजा में कमल के फूल का धार्मिक महत्व
मां लक्ष्मी की पूजा में कमल का फूल जरूर शामिल करना चाहिए। कमल का फूल कीचड़ में उगता है, लेकिन उसकी पंखुड़ियों पर कीचड़ नहीं टिकती। यह फूल इस बात का प्रतीक है कि व्यक्ति को सांसारिक मोह-माया, धन और बुराइयों के बीच रहते हुए भी अपने मन को पवित्र रखना चाहिए। मां लक्ष्मी को कमलवासिनी भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कमल के पुष्प पर विराजमान रहने वाली देवी। महालक्ष्मी व्रत की पूजा के दौरान देवी को कमल का फूल अर्पित करने से वे प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं और घर में सदैव मां लक्ष्मी का वास होता है।
कब से कब तक रहेगा महालक्ष्मी व्रत?
वैदिक पंचांग के अनुसार, महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत 19 सितंबर से हुई है और इसका समापन 3 अक्टूबर को होगा। इस दौरान देवी की रोजाना पूजा-अर्चना जरूर करें और विशेष चीजों का भोग लगाएं। इसके अलावा मंदिर में या जरूरतमंद लोगों को अन्न-धन आदि का दान करें
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