पितृ पक्ष में गाय, कौए और कुत्ते को भोजन कराना क्यों जरूरी है? सिर्फ परंपरा नहीं, छिपे हैं कई गूढ़ रहस्य
पितृ पक्ष में गाय, कौए और कुत्ते को भोजन कराने का विशेष महत्व होता है, ऐसा माना जाता है कि ...और पढ़ें

पितृ पक्ष में गाय, कौए और कुत्ते को भोजन क्यों कराएं (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
गाय को भोजन कराने से पितरों को सीधा भोजन मिलता है।
कौए को भोजन कराने से शनि और पितृ दोष शांत होते हैं।
कुत्ते को भोजन कराने से केतु के अशुभ प्रभाव से बचाव होता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एक ऐसी अवधि आती है जब हमारे पूर्वज किसी न किसी रूप में हमारे आस-पास मौजूद होते हैं। इस दौरान पूर्वजों की आत्माएं पितृ लोक से धरती पर आती हैं और अपने वंशजों पर कृपा बरसाती हैं। इस दौरान एक निश्चित तिथि पर पूर्वजों के नाम का तर्पण और श्राद्ध किया जाता है।
इस साल पितृ पक्ष का आरंभ भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर से हो रहा है और इसका समापन 10 अक्टूबर, सर्वपितृ अमवस्या के दिन होगा। इन पूरे सोलह दिनों में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए कई उपाय किए जाते हैं और इन सभी दिनों में मुख्य रूप से गाय, कौए और कुत्ते के लिए भोजन निकाला जाता है।
ऐसा कहा जाता है कि इन पशुओं को जो भोजन खिलाया जाता है वो पूर्वजों तक पहुंचता है। वहीं श्राद्ध की तिथि पर पंचबलि कर्म करने की परंपरा है जिसमें इन तीन पशुओं के साथ चींटी और देवताओं के लिए भी भोजन निकाला जाता है। आइए एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी श्री चंद्रेश शर्मा से जानें पितृ पक्ष में गाय, कुत्ते और कौए को भोजन कराने का महत्व क्या है
गाय को भोजन कराने का महत्व
गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है। गाय को भोजन कराने से गुरु और शुक्र ग्रह बलवान होते हैं और पितरों को सीधे भोजन की प्राप्ति होती है।
गाय के माध्यम से जो भोजन पूर्वजों तक जाता है उससे उनका आशीर्वाद मिलता है और वंशजों के ऊपर पितरों की विशेष कृपा रहती है। आप इन सोलह दिनों की अवधि में नियमित आपको पहली रोटी गाय के लिए जरूर निकालनी चाहिए।
पितृ पक्ष में कौए को भोजन कराने का महत्व
कौए को यम का संदेशवाहक और पूर्वजों का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि, कौए द्वारा ग्रहण किया गया भोजन सीधे पूर्वजों तक पहुंचता है। कौए को तृप्त करने से शनि दोष और पितृ दोष शांत होते हैं।
अगर आपके घर में भी पितृ दोष है तो आप नियमित रूप से कौए के लिए भोजन अवश्य निकालें। आप दूसरी रोटी को कौए के नाम से निकालें और घर के बाहर रखें। कौए के द्वारा खाई गई रोटी पूर्वजों तक जाती है और आपको किसी भी तरह के पितृ दोष से बाहर आने में मदद मिलती है।
कुत्ते को भोजन कराने का महत्व
कुत्ते को यमराज और भगवान भैरव की सवारी माना गया है। ज्योतिष में इसका संबंध केतु ग्रह से भी होता है। पितृ पक्ष के दौरान आप अगर कुत्ते को भोजन कराते हैं, तो केतु का अशुभ प्रभाव से बचा जा सकता है और पितृ दोष को दूर करने में भी मदद मिलती है। श्राद्ध के दौरान बनाए गए भोजन में तीसरी रोटी रोज कुत्ते के नाम से निकालें और इसे कुत्ते को खिलाएं। ऐसा करने से आपके ऊपर पूर्वजों की विशेष कृपा बनी रहेगी।
अगर आप भी पितृ पक्ष में नियमित इन पशुओं के नाम से भोजन निकालते हैं और उन्हें अर्पित करते हैं, तो पूर्वजों की कृपा हमेशा बनी रहती है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
