आखिर क्यों रखा जाता है महालक्ष्मी व्रत? अभी जान लें मां लक्ष्मी के आगमन और सुख-समृद्धि से जुड़ी यह पौराणिक कथा
महालक्ष्मी व्रत मां लक्ष्मी को समर्पित 16 दिवसीय व्रत है, जो 19 सितंबर 2026 से शुरू होकर 3 अक्टूबर 2026 ...और पढ़ें

कब से शुरू होगा महालक्ष्मी व्रत (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में महालक्ष्मी व्रत (Mahalaxmi vrat 2026) मां लक्ष्मी को समर्पित है। यह व्रत 16 दिनों तक चलता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस व्रत की शुरुआत भाद्रपदमाह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होती है। वहीं, इसका समापन आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर होता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना और व्रत करने से घर से दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक तंगी की समस्या से छुटकारा मिलता है। क्या आप जानते हैं कि महालक्ष्मी व्रत क्यों किया जाता है? अगर नहीं पता, तो आइए इस लेख में आपको इसके महत्व के बारे में बताते हैं।
कब से शुरू होगा महालक्ष्मी व्रत 2026?
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 18 सितंबर को दोपहर 1 बजे होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 19 सितंबर को दोपहर 03 बजकर 26 मिनट पर होगा। ऐसे में महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत 19 सितंबर से होगी और 3 अक्टूबर को आखिरी महालक्ष्मी व्रत किया जाएगा।
क्यों किया जाता है महालक्ष्मी व्रत?
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। वह विष्णु जी की पूजा-अर्चना किया करता था। उसकी भक्ति से प्रभु प्रसन्न हुए और उससे वर मांगने के लिए कहा। तब ब्राह्मण ने विष्णु जी से कहा कि उसके घर में मां लक्ष्मी का वास हो। इसके लिए विष्णु जी ने बताया कि मंदिर के सामने एक महिला आती है, जो उपले थापती है, वही धन की देवी है। आप उसे घर आने का निमंत्रण दें। प्रभु ने कहा कि जब देवी का घर में आगमन होगा, तो तुम्हारा घर धन-धान्य से भर जाएगा। भगवान विष्णु की इस बात को ब्राह्मण ने स्वीकार किया।
जब अगले दिन लक्ष्मी जी उपले थापने वहां आईं, तो ब्राह्मण ने देवी को घर आने के लिए कहा। ब्राह्मण की बात को मां लक्ष्मी समझ गईं। इसके बाद देवी ने ब्राह्मण को महालक्ष्मी व्रत करने की सलाह दी। साथ ही मां लक्ष्मी ने कहा कि महालक्ष्मी व्रत सोलह दिनों तक करने से सभी मुरादें पूरी होंगी। ब्राह्मण की तपस्या से मां लक्ष्मी प्रसन्न हुईं। मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से भक्त को जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत का महत्व भविष्य पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
