सनातन धर्म की 5 परम पूजनीय देवियां, जिनके स्मरण मात्र से मिलती है सफलता और समृद्धि
सनातन धर्म में पांच ऐसी देवियां हैं जिनका स्मरण किसी भी कार्य में सफलता दिलाता है और जिनकी उपस्थिति के बिना धार्मिक अनुष्ठान अधूरे माने जाते हैं।

पांच शक्तिशाली हिंदू देवियां
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े कई ऐसे विशेष नियम हैं, जो हिंदू परंपरा को अलग बनाती है। अक्सर हम किसी भी नए काम की शुरुआत से पहले भगवान का स्मरण जरूर करते हैं, ताकि कार्य में किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न न हो। लेकिन क्या आपको पता है कि, हिंदू धर्म में भक्ति परंपरा में 5 ऐसी देवियां हैं, जिनका स्थान सबसे ऊपर बताया जाता है।
इन देवियों के स्मरण मात्र से किसी भी काम में सफलता जरूर मिलती है। चाहे कोई बड़ा यज्ञ हो या घर में होने वाली नियमित पूजा इन देवियों की उपस्थिति के बिना धार्मिक अनुष्ठान करना अधूरा माना जाता है। आइए जानते हैं सनातन धर्म की पांच अत्यंत पूजनीय देवियों के बारे में।

देवी दुर्गा
देवी दुर्गा जो कि शक्तिशाली योद्धा है, बुरी शक्तियों और राक्षसों से लड़ने के लिए तत्पर हैं और शांति, समृद्धि और धर्म को खतरे में डालने वाली हर चीज का डटकर सामना करती हैं। हिंदू धर्म में मां दुर्गा को अत्यंत पूजनीय देवी माना जाता है।
मां काली
काली का मतलब है, 'समय' जो जीवन और मृत्यु की देवी मानी जाती हैं। मां काली सबसे भयानक और उग्र देवी जो कटे हुए सिरों की माला और कटी हुई भुजाओं के वस्त्र धारण करती हैं। मां काली वह हैं जो अहंकार का सिर काट सकती है। मां काली अपने भक्तों की मदद सबसे कठिन समय में करती हैं।
लक्ष्मी माता
सनातन धर्म के अनुसार, मां लक्ष्मी समृद्धि और प्रचुरता की देवी हैं जो अपने भक्तों को सौभाग्य प्रदान करती हैं। लक्ष्मी मां न सिर्फ भौतिक रूप से बल्कि सौभाग्य और धन से भी जुड़ी देवी हैं जो अच्छे स्वास्थ्य और सुखमय जीवन का वरदान भी देती हैं।
कमल पर विराजमान रहने वाली मां लक्ष्मी व्यक्तिगत विकास, आध्यात्मिक मुक्ति, सौभाग्य और आत्मज्ञान का प्रतीक मानी जाती है।
पार्वती
माता पार्वती को उर्वरता, प्रेम, सौंदर्य और विवाह का प्रतीक माना जाता है। मां लक्ष्मी और मां सरस्वती के साथ मिलकर वे हिंदू देवियों की 'त्रिदेवी' की रचना करती हैं। पार्वती माता, धरती माता की तरह कोमल और पालन-पोषण प्रदान करने के लिए जानी जाती हैं। जब जीवन में हमें अधिक पालन-पोषण और स्थिरता की जरूरत महसूस होती है, तो हमें उनकी पूजा जरूर करनी चाहिए।
सरस्वती देवी
मां सरस्वती ज्ञान, संगीत, कला, बु्द्धि और साहित्य की देवी मानी जाती हैं। सरस्वती माता की पूजा आमतौर पर वसंत ऋतु में की जाती है, और उनके पर्व के दिन माता-पिता अक्सर अपने बच्चों को ज्ञान की बातें सिखाते हैं। ऋग्वेद जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी उनका सम्मान किया जाता है। मां सरस्वती को 'सर्वोत्तम माता, सर्वोत्तम नदी और सर्वोत्तम देवी' का दर्जा दिया है।
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