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Mahalaxmi Vrat 2026: 16 गांठों का क्या है महत्व? जानें मां लक्ष्मी की पूजा से जुड़ी खास मान्यता और इसका शुभ फल

Published: Sat, 19 Sep 2026 04:00 PM (IST)

महालक्ष्मी व्रत में 16 गांठों वाले रक्षासूत्र का विशेष महत्व है, जिसे मां लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों और व्रत के ...और पढ़ें

महालक्ष्मी व्रत में 16 गांठों वाले रक्षासूत्र का महत्व और पूजा विधि । (Picture Credit- AI Generated)

महालक्ष्मी व्रत में 16 गांठों वाले रक्षासूत्र का महत्व और पूजा विधि । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महालक्ष्मी व्रत मां लक्ष्मी को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। 16 दिन के इस पर्व में भक्‍त मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करते हैं और घर में उनकी स्‍थापना करते हैं। मां लक्ष्‍मी का व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य बना रहता है। महालक्ष्मी व्रत से जुड़ी वैसे तो कई सारी धार्मिक परंपराएं और रीति-रिवाज हैं, जिनमें 16 गांठों वाला रक्षासूत्र या डोरा देवी को अर्पित करना भी विशेष महत्व रखता है।

इस परंपरा के बारे में हमने एस्‍ट्रोपत्री के ज्योतिष चंद्रेश शर्मा से बात की। उनके अनुसार, "इस डोरे को महालक्ष्मी व्रत की प्रमुख परंपराओं में से एक माना जाता है। कलश स्‍थापना के साथ इसे रखना बहुत ही शुभ होता है। "

महालक्ष्मी व्रत में 16 गांठों का क्या महत्व है?

महालक्ष्मी व्रत के दौरान लाल या पीले रंग के धागे में 16 गांठें लगाई जाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन गांठों को मां लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों और व्रत के 16 दिनों से जोड़ा जाता है। हर गांठ के साथ मां लक्ष्मी का ध्यान और मंत्र जाप करने से रक्षासूत्र ऊर्जावान और विशेष

यह धागा केवल एक सामान्य कलावा नहीं माना जाता, बल्कि इसे मां लक्ष्मी की कृपा और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। भक्त श्रद्धा के साथ इसे पूरे व्रत के दौरान पूजास्थल पर रखते हैं।

कैसे तैयार किया जाता है 16 गांठों वाला डोरा?

महालक्ष्मी व्रत के पहले दिन कलावा या लाल-पीले रेशमी धागे में 16 गांठें लगाई जाती हैं। परंपरा के अनुसार, प्रत्येक गांठ लगाते समय मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप किया जाता है और देवी के स्वरूप का ध्यान किया जाता है।

गांठें लगाने के बाद इस रक्षासूत्र को मां लक्ष्मी के चरणों में रखा जाता है। पूरे व्रत के दौरान इसकी पूजा की जाती है। इस तरह 16 दिनों तक यह डोरा मां लक्ष्मी के पास ही रखा रहता है और इसकी भी वैसे ही पूजा हेाती है, जैसे देवी लक्ष्‍मी की जाती है।

व्रत पूरा होने पर कैसे धारण करें डोरा?

महालक्ष्मी व्रत की अवधि पूरी होने के बाद इस 16 गांठ वाले रक्षासूत्र को धारण भी किया जा सकता है और कलश विसर्जन के साथ विसर्जित भी कर सकते हैं। अमूमन पुरुष इस धागे को दाहिनी कलाई पर और महिलाएं बाईं कलाई पर बांधती हैं।

16 गांठों वाला डोरा किसका प्रतीक है?

16 गांठों वाले इस रक्षासूत्र को सुरक्षा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यह भक्‍त के लिए मां लक्ष्मी का आशीर्वाद और सुरक्षा का विश्‍वास होता है। ऐसा माना जाता है कि इसे धारण करने से आर्थिक परेशानियां कम होती हैं और घर में सकारात्मकता बनी रहती है। इसे नकारात्मक ऊर्जा और ग्रहों के अशुभ प्रभावों से बचाव का प्रतीक भी माना गया है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।