19 सितंबर को महासंयोग, एक ही दिन राधा अष्टमी और महालक्ष्मी व्रत, किस समय किसकी करें पूजा?
आज 19 सितंबर को राधा अष्टमी और महालक्ष्मी व्रत एक साथ मनाए जा रहे हैं। आइए जानते हैं दोनों पर्वों की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और भोग के बारे में।

राधा रानी और मां लक्ष्मी को एक साथ ऐसे करें प्रसन्न (Picture Credit: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि बहुत ही खास है। आज यानी 19 सितंबर को राधा अष्टमी (Radha Ashtami 2026) का पर्व मनाया जा रहा है। वहीं, आज से धन और ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाला 16 दिनों का महालक्ष्मी व्रत भी शुरू हुआ है।
जब एक ही दिन 2 बड़े पर्व होते हैं, तो लोगों के मन में सवाल आता है कि दोनों की पूजा एक साथ कैसे करें। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि महालक्ष्मी व्रत और राधा अष्टमी की पूजा कैसे करें?
राधा अष्टमी की पूजा करने का शुभ मुहूर्त (Radha Ashtami Shubh Muhurat)
सुबह 11 बजकर 01 मिनट से दोपहर 01 बजकर 28 मिनट तक है। इस दौरान किसी भी समय राधा जी की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
राधा अष्टमी की कैसे करें पूजा?
- स्नान करने के बाद महालक्ष्मी और राधा अष्टमी व्रत का संकल्प लें। सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- राधा अष्टमी की पूजा सुबह या दोपहर के समय करना शुभ माना जाता है।
- चौकी पर कपड़ा बिछाकर श्री राधा-कृष्ण की मूर्ति को विराजमान करें।
- पंचामृत से स्नान कराने के बाद सुंदर वस्त्र पहनाएं।
- इसके बाद किशोरी जी का श्रृंगार करें।
- दीपक जलाकर आरती करें।
- राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र और कथा का पाठ करें।
इन मुहूर्त में करें महालक्ष्मी व्रत की पूजा
प्रातःकाल मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 57 मिनट से 6 बजकर 8 मिनट तक
दूसरा शुभ मुहूर्त: सुबह 7 बजकर 40 मिनट से लेकर 9 बजकर 11 मिनट तक
मध्याह्न शुभ मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 1 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक
इन मुहूर्त में आप महालक्ष्मी व्रत की पूजा-अर्चना और कलश स्थापना कर सकते हैं।
महालक्ष्मी व्रत की पूजा विधि
- एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर कलश की स्थापना करें और मां लक्ष्मी की प्रतिमा रखें।
- एक सूती धागे में 16 गांठें लगाकर उसे हल्दी से पीला करें और मां लक्ष्मी को अर्पित करें। पूजा के बाद इसे दाहिने हाथ में बांध लें।
- इसके बाद मां लक्ष्मी को रोली, अक्षत, कमल का फूल अर्पित करें।
- 16 श्रृंगार की चीजें अर्पित करें।
- दीपक जलाकर मां लक्ष्मी की आरती करें और कथा पढ़ें।
- पूजा के दौरान मंत्रों का जप जरूर करें।
इन चीजों का लगाएं भोग
राधा रानी को पेड़ा या पंजीरी, फल का भोग लगाएं। वहीं, मां लक्ष्मी को खीर या सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
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