त्रिदेवों का निवास

वट सावित्री व्रत में वट वृक्ष जिसका अर्थ है बरगद का पेड़, का खास महत्व होता है। इस पेड़ में लटकी हुई शाखाओं को सावित्री देवी का रूप माना जाता है। वहीं पुराणों के अनुसार बरगद के पेड़ में त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास भी माना जाता है। इसलिए कहते हें कि इस पेड़ की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस वृक्ष को देव वृक्ष माना जाता है वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा जी का, तने में भगवान विष्णु का तथा डालियों एवं पत्तियों में भगवान शिव का निवास कहा जाता है। इसके साथ ही अक्षय वट वृक्ष के पत्ते पर ही भगवान श्रीकृष्ण ने मार्कंडेय ऋषि को दर्शन दिए थे यह अक्षय वट वृक्ष प्रयाग में गंगा तट पर वेणीमाधव के निकट स्थित है।

अखंड सौभाग्‍य के लिए होती है पूजा

वट सावित्री के दिन बट वृक्ष की पूजा दीर्घायु सुहाग यानि अखंड सौभाग्यवती के लिए की जाती है। 

अमावस्या के दिन बांस की टोकरी लें उसमें से सप्त धान, गेहूं, चावल, तेल, कांगनी और श्यामक आदि भर लें और उनमें से एक पर ब्रह्मा और सावित्री कथा दूसरी टोकरी में सत्यवान और सावित्री की प्रतिमा स्थापित करें यदि इनकी प्रतिमाएं आपके पास नहीं है तो मिट्टी की प्रतिमा बनाई जा सकती है। अब वट वृक्ष के नीचे बैठ कर पहले ब्रह्मा सावित्री और फिर सत्यवान सावित्री का पूजन करें सावित्री के पूजन में सौभाग्य की वस्तुएं काजल, मेहंदी, चूड़ी, बिंदी, वस्त्र, आभूषण और दर्पण इत्यादि चढ़ाएं, तथा वटवृक्ष का पूजन करें। पूजन करने के बाद वट की जड़ों में जल चढ़ायें। अब वृक्ष के तने पर 50 फुट के करीब कच्‍चा सूत 108 बार लपेटने का विधान है। यदि इतना ना कर सकें तो न्यूनतम 7 बार तो परिक्रमा करनी ही चाहिए। अंत में वट सावित्री व्रत की कथा सुननी चाहिए।

क्‍या सिखाती है वट सावित्री व्रत कथा

इस व्रत की कथा हमें स्‍त्री की शक्ति और प्रकृति के करीब रहना सिखाती है। बट सावित्री व्रत में बरगद का पूजन उनके संरक्षण का संदेश देता है। पर्यावरण विद भी बताते हैं कि वट वायुमंडल के लिए अत्यंत ही उपयोगी है। यह वृक्ष जिस स्थान पर लगा होता है उसके आसपास प्रदूषण का स्तर कम हो जाता है। बरगद की औसतन आयु 150 वर्ष से अधिक है। इसकी जड़ से लेकर पत्‍ती और फल तक से 25 तरह की औषधि बन सकतती हैं। साथ ही उसका फल पंछियों के लिए सर्वोत्‍म भोज्य पदार्थ है। बरगद में ग्रहों का वास माना जाता है और बरगद का पूजन कर लिया जाए तो कुछ उपायों से जन्म पत्रिका में ग्रहदोष कम हो जाते हैं। मंगलवार को वट वृक्ष का पूजन करने से दीर्घायु हासिल होती है और वट वृक्ष पर सफेद वस्त्र, सफेद धागा लपेटने से नाड़ी दोष से मुक्ति मिलती है। गुरुवार को 108 परिक्रमा करने से मांगलिक दोष में कमी आती है और वटवृक्ष को लगाने से कुल के पितृदोष में कमी होती है। बट वृक्ष के पत्तों का बंदनवार लगाने से गृह क्लेश में कमी आती है और वट वृक्ष के फलों के खाने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। 

 

By Molly Seth