Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    Shiv Puja Niyam: शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय इन बातों का रखें ध्यान, बन जाएंगे सारे बिगड़े काम

    By Pravin KumarEdited By: Pravin Kumar
    Updated: Fri, 28 Apr 2023 03:36 PM (IST)

    Shiv Puja Niyam धार्मिक मान्यता है कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद परिक्रमा न करें। ऐसा करने से पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है। परिक्रमा करने के लिए शि ...और पढ़ें

    Shiv Puja Niyam: शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय इन बातों का रखें ध्यान, बन जाएंगे सारे बिगड़े काम
    Zodiac Wheel

    वार्षिक राशिफल 2026

    जानें आपकी राशि के लिए कैसा रहेगा आने वाला नया साल।

    अभी पढ़ें

    नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क | Shiv Puja Niyam: सोमवार का दिन देवों के देव महादेव को समर्पित होता है। इस दिन महादेव की विशेष पूजा उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भक्ति भाव से देवों के देव महादेव की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही सुख, समृद्धि, यश और कीर्ति की प्राप्ति होती है। इसके लिए साधक सोमवार समेत अन्य दिनों में भी विधि पूर्वक महादेव की पूजा करते हैं। हालांकि, बहुत कम लोगों को शिवलिंग पर जल चढ़ाने के सही नियम पता है। आइए, शिवलिंग पर जल चढ़ाने के नियम जानते हैं-

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    -सनातन शास्त्रों की मानें तो शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय मुख हमेशा दक्षिण दिशा में रहना चाहिए। आसान शब्दों में कहें तो दक्षिण दिशा में खड़े होकर शिवलिंग पर जल का अर्घ्य देना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में मुख कर जल का अर्घ्य देने से शिवजी प्रसन्न होते हैं। साथ ही साधक की पूजा को स्वीकार करते हैं। इससे साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

    -ज्योतिषियों की मानें तो दक्षिण दिशा में मुख कर शिवलिंग को जल का अर्घ्य देते समय एक चीज का ध्यान रखें कि जल उत्तर दिशा से गिरे। कहते हैं कि इससे देवों के देव महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

    -धार्मिक मान्यता है कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद परिक्रमा न करें। ऐसा करने से पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है। परिक्रमा करने के लिए शिवलिंग पर अर्पित जल को लांघना पड़ता है। शास्त्र में ऐसा करने की मनाही है। इसके लिए जल चढ़ाने के बाद परिक्रमा बिल्कुल न करें।

    -सनातन शस्त्रों की मानें तो शिवलिंग पर जल का अर्घ्य देते समय मुख उत्तर, पश्चिम या पूर्व दिशा में न रखें। इन दिशाओं में भगवान शिव के अंग पीठ और कंधा हैं। ऐसा करने से पूजा का फल नहीं मिलता है।

    डिसक्लेमर: 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'