करवाचौथ पर इस कथा को पढ़े बिना पूरा नहीं होगा व्रत! अखंड सौभाग्य और खुशहाल दांपत्य जीवन का मिलेगा वरदान
करवाचौथ का व्रत अखंड सौभाग्य और खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन व्रत कथा का ...और पढ़ें

करवाचौथ व्रत कथा: अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र का रहस्य (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
करवाचौथ व्रत कथा अखंड सौभाग्य और खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए।
वीरावती की कहानी सच्ची श्रद्धा और व्रत का महत्व बताती है।
गलत व्रत तोड़ने से पति की मृत्यु, फिर जीवनदान मिला।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। करवाचौथ का व्रत सुहागिन महिलाऐं इस श्रद्धा और विश्वास से मनाती हैं कि इस व्रत का पालन करने से उनके वैवाहिक जीवन में सदैव खुश्शली बनी रहेगी। यह व्रत हर साल कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास करती हैं और रात के समय चांद को देखकर अर्घ्य देने के बाद इस व्रत का पारण करती हैं।
इस साल यह व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन जितना महत्व पूजा और उपवास का है उससे कहीं ज्यादा पूजा के समय व्रत कथा का पाठ करने का है। अगर आप भी इस दिन यहां बताई व्रत कथा का पाठ करेंगी, तो आपके दांपत्य जीवन में सदैव प्रेम बना रहेगा और पति को दीर्घायु का आशीर्वाद मिलेगा।
करवा चौथ व्रत कथा-वीरावती की कहानी (Karwa Chauth Vrat Katha)
एक समय की बात है एक साहूकार के सात पुत्र और एक पुत्री थी, जिसका नाम वीरावती था। 7 भाइयों की अकेली बहन होने की वजह से वीरावती सभी भाइयों को अत्यंत प्रिय थी। एक बार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को साहूकार की पत्नी समेत उसकी सातों बहुओं और पुत्री ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। पूरे दिन उपवास करने की वजह से भाइयों की एकलौती बहन वीरावती व्याकुल हो रही थी।
रात्रि के समय जब साहूकार के सभी बेटे भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन का आग्रह किया। बहन ने भोजन से मना कर दिया क्योंकि उसका करवाचौथ का उपवास था। बहन ने बताया कि वो चंद्रमा के दर्शन के बाद ही अन्न और जल ग्रहण कर सकती है। साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे और वो बहन को भूख से व्याकुल नहीं देख सकते थे।
सभी भाइयों ने विचार किया कि अगर किसी कारण से चंद्रमा जल्दी निकल आएगा तो बहन व्रत खोलकर पानी और अन्न ग्रहण कर लेगी।
इस वजह से साहूकार के बेटे घर के बाहर गए और वहां एक पेड़ पर चढ़कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा कि देखो बहन, चांद निकल आया है और तुम अब चंद्र दर्शन करके अपना व्रत खोल सकती हो। साहूकार की बेटी वीरावती ने अपनी भाभियों से भी चंद्रमा के दर्शन करके व्रत खोलने का आग्रह किया, लेकिन उनकी भाभियों ने इस बात से मना कर दिया और कहा कि अभी चांद नहीं निकला है बल्कि उनके भाइयों ने चंद्रमा का भ्रम दिखाया है जिससे उनकी बहन अपना व्रत खोल सके।
बहन ने भाभियों की बात को अनसुना कर दिया और अपने भाइयों की बात मानकर नकली चांद को अर्घ्य देकर अन्न जल ग्रहण करने लगी। जैसे ही वीरावती ने भोजन करना शुरू किया, उसके साथ अनहोनी घटनाएं होने लगीं। भोजन के पहले ही कौर में उसे बाल मिला, दूसरे कौर में उसे जोर से छींक आ गई और तीसरे कौर में उसे ससुराल से बुलावा मिला कि उसका पति बहुत बीमार हैं। वीरावती तुरंत अपने ससुराल पहुंची, लेकिन वहां पहुंचते ही उसने देखा कि उसके पति की मृत्यु हो चुकी है। यह देखकर वीरावती रोने लगी।
उसी समय वहां देवी इंद्राणी प्रकट हुईं और उन्होंने वीरावती को बताया कि गलत समय पर व्रत तोड़ दिया था, इसलिए उसके पति की मृत्यु हुई है। देवी इंद्राणी ने वीरावती से कहा कि अगर वह अगले साल पूरी श्रद्धा के साथ करवाचौथ का व्रत करेगी, तो उसके पति को जीवनदान मिल सकता है।
वीरावती को जब अपनी गलती का अनुमान हुआ तब उसे इस बात का पश्चाताप हुआ। उसने निश्छल भाव से गणेश जी की प्रार्थना की और उनसे क्षमा मांगी। यही नहीं साहूकार की बेटी ने विधि-विधान के साथ प्रत्येक चतुर्थी का व्रत आरंभ किया।
वीरावती की इस निश्छल भक्ति को देखकर गणेश और करवा माता की उस पर कृपा हुई और जब अगले साल करवचौथ आया, तो करवा माता के आशीर्वाद से उसके पति को जीवनदान मिल गया।
जैसे साहूकार की बेटी के पति को व्रत के प्रभाव से जीवनदान मिला वैसे ही गणपति भगवान और करवा माता सभी के पतियों को दीर्घायु प्रदान करें।
करवा माता की जय !
यदि आप भी करवाचौथ के दिन इस व्रत कथा का पाठ करेंगी और पूरे श्रद्धा भाव से चंद्रमा को अर्घ्य देंगी तो आपको भी सुखी दाम्पत्य जीवन का आशीर्वाद मिलेगा।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
