कन्या पूजन में बच्चियों को खाना खिलाते समय प्लास्टिक के बर्तनों का करते हैं इस्तेमाल? तो बदल लें यह आदत
कन्या पूजन में कन्याओं को प्रसाद परोसने के लिए प्लास्टिक के बर्तनों से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीतल, ...और पढ़ें

कन्या पूजन में बच्चियों को किस बर्तन में खाना परोसें (Picture Credits- AI Images)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल की तरह इस साल भी शारदीय नवरात्र की अष्टमी और नवमी तिथि के मौके पर छोटी-छोटी लड़कियों को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर कन्या पूजन किया जाएगा। इस साल कन्या पूजा के लिए अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर 2026, रविवार को पड़ रही है।
वहीं, नवमी तिथि उसके अगले दिन यानी 19 अक्टूबर सोमवार को है। कन्या पूजन के दौरान कन्याओं का माता का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करने के साथ हलवा, पुरी और चना का प्रसाद खिलाया जाता है।
हममें से अधिकतर लोग कन्या पूजन के दिन बनने वाले भोजन का खास ध्यान रखते हैं, लेकिन बात जब उन्हें परोसने की आती है, तो छोटी-छोटी कन्याओं के लिए प्लास्टिक या ऐसे बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं, जो बच्चियों को काफी आकर्षित करती है, लेकिन क्या धार्मिक नजरिए से कन्या पूजन के दौरान प्लास्टिक के आकर्षक बर्तन में खिलाना सही माना गया है? आइए जानते हैं इसके बारे में।
कन्या पूजन में कन्याओं को किस बर्तन में खाना खिलाएं?
कन्या पूजन जिसमें छोटी-छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का ही बाल स्वरूप मानकर उनकी सेवा की जाती है। हममें से अधिकतर लोग मार्केट में बिकने वाले प्लास्टिक के आकर्षक प्लेटों और डिब्बों में कन्या को खाना खिलाते हैं। हमारे शास्त्रों में बर्तनों का भी महत्व बताया गया है।
पहले के समय प्रसाद हमेशा केले के पत्तों या धातु के बर्तनों में ही दिया जाता था। हिंदू मान्यताओं में पीतल और तांबा के बर्तनों को बेहद शुद्ध और पवित्र माना जाता है। हालांकि कई लोग इन धातु के अधिक महंगे होने की वजह से इन्हें नहीं खरीदते हैं, ऐसे में कम से कम उन्हें स्टील के बर्तनों में ही कन्याओं को खाना खिलाना चाहिए।
जब हम देवता को भोग लगाते समय प्लास्टिक के बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करते हैं, हमेशा साफ धातु के बर्तनों का प्रयोग करते हैं, क्योंकि वहां हम श्रद्धा, पवित्रता, शुद्धता और सम्मान की भावना रखते हैं। ठीक उसी तरह जब हम कन्याओं को प्रसाद देते हैं, तो हमें वही भाव रखना चाहिए, क्योंकि उस समय हम सिर्फ एक बच्ची की पूजा ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि बालिका के रूप में मां की सेवा कर रहे हैं।
धार्मिक मान्यता है कि, प्रसाद को अशुद्ध बर्तन में देने से उसकी पवित्रता कम हो जाती है और जब पवित्रता कम होती है तो उसका आध्यात्मिक प्रभाव भी कम हो जाता है। प्लास्टिक के प्लेट में कन्याओं को भोजन कराने से प्रसाद दूषित हो सकता है। वह सिर्फ सामान्य भोजन ही बनकर रह जाता है। इसी वजह से ऐसी मान्यता है कि कन्या पूजन के दौरान प्लास्टिक के प्लेट में बच्चों को खाना नहीं खिलाना चाहिए।
कन्याओं को किस बर्तन में खिलाएं प्रसाद?
कन्या पूजन के दौरान यदि संभव हो तो पीतल की थाली में बच्चों को प्रसाद परोसना चाहिए और यदि वह उपलब्ध न हो तो कम से कम स्टील की थाली का इस्तेमाल तो करना ही चाहिए। यह न सिर्फ शुद्ध होता है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी उपयुक्त माना जाता है। इसलिए अगली बार जब भी आप कन्या पूजन करें तो इस बात जरूर ध्यान रखें कि प्रसाद सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं है। यह शुद्धता का प्रतीक है।
यह भी पढ़ें- कन्या पूजन 2026: हलवा, पूड़ी और चने के बिना क्यों अधूरी मानी जाती है मां दुर्गा की पूजा?
यह भी पढ़ें- कंजक पूजन में कन्याओं के पैरों में आलता क्यों लगाया जाता है? सिर्फ परंपरा नहीं, छिपे हैं कई गूढ़ रहस्य
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
