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    साल 2024 की आखिरी Amavasya पर बन रहा है ये महासंयोग, सभी कार्य होंगे सिद्ध

    Updated: Sat, 21 Dec 2024 09:44 AM (IST)

    अमावस्या प्रत्येक महीने मनाई जाती है। यह दिन पितृ पूजा के तर्पण और उपासना के लिए समर्पित है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल 30 दिसंबर को (Paush Amavasya 2024) पौष अमावस्या मनाई जाएगी। ऐसा कहते हैं कि इस दिन पूजा-पाठ व धार्मिक कार्यों में शामिल होना चाहिए। इससे इस दिन की किसी भी नकारात्मक ऊर्जा का असर जीवन पर नहीं पड़ता है।

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    Paush Amavasya 2024: अमावस्या 2024 शुभ संयोग।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में अमावस्या का बड़ा महत्व है। यह सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है, जो पितरों को समर्पित है। अमावस्या के दिन लोग अपने पूर्वजों की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद मांगते हैं। इस दिन को कई आध्यात्मिक व धार्मिक गतिविधियों, संस्कारों और प्रथाओं के लिए शुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, दिसंबर महीने में पौष अमावस्या 30 दिसंबर 2024 को मनाई जाएगी।

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    वहीं, इस पावन तिथि पर एक दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिस वजह से इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है, तो आइए उस महासंयोग के बारे में जानते हैं।

    पौष अमावस्या 2024 बन रहा है ये शुभ संयोग

    हिंदू पंचांग के अनुसार, साल की अंतिम अमावस्या पर इस बार बहुत ही खास मानी जा रही है, क्योंकि यह सोमवार को पड़ रही है। वहीं, इसके साथ ही वृद्धि योग का शुभ संयोग बन रह है। यह सुबह से लेकर रात 8 बजकर 32 मिनट तक रहेगा।

    कहते हैं कि इस दौरान किसी भी प्रकार का कार्य करने से उसमें सफलता मिलती है। इसके साथ ही शिव-पार्वती की कृपा मिलती है। इसके अलावा अन्न और धन में भी बढ़ोत्तरी होती है।

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    अमावस्या स्नान-दान समय (Amavasya 2024 Snan-Daan Samay)

    हिंदू पंचांग के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त 05 बजकर 16 मिनट से 06 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। फिर विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 07 मिनट से 02 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही अमृत काल शाम 05 बजकर 24 मिनट से शाम 07 बजकर 02 मिनट तक रहेगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह स्नान और दान के लिए बहुत ही शुभ समय माने गए हैं।

    इन मंत्रों से करें पितरों का तर्पण

    • ॐ पितृ देवतायै नमः।।
    • ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।।
    • ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः।।

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    अस्वीकरण: ''इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है''।