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    Kajari Teej 2025: कब मनाया जाएगा कजरी तीज का त्योहार? अभी नोट करें डेट और शुभ मुहूर्त

    Updated: Wed, 09 Jul 2025 12:02 PM (IST)

    भाद्रपद माह (Bhadrapada Month 2025) के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि का कुंवारी लड़कियां और सुहागिन महिलाएं बेसब्री से इंतजार करती है क्योंकि इस तिथि पर कजरी तीज (Kajari Teej 2025 Date) का व्रत किया जाता है। इस व्रत को करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्त होती है।

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    Kajari Teej 2025: कजरी तीज का धार्मिक महत्व

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर कजरी तीज का पर्व मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है। संतान प्राप्ति के लिए भी इस व्रत को किया जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कजरी तीज की डेट और शुभ मुहूर्त के बारे में।

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    कजरी तीज 2025 व्रत  का महत्व (Kajari Teej 2025 Significance)

    इस व्रत को कुंवारी लड़कियां और सुहागिन महिलाएं विधिपूर्वक करती हैं। धार्मिक मान्यता मान्यता के अनुसार, इस व्रत की शुरुआत मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए की थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कजरी तीज के व्रत को करने से पति को लंबी आयु का वरदान प्राप्त होता है। साथ ही मनचाहे वर की प्राप्ति होती है।

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    कजरी तीज 2025 डेट और शुभ मुहूर्त (Kajari Teej 2025 Date and Shubh Muhurt)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 11 अगस्त को सुबह 10 बजकर 33 मिनट से होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 12 जुलाई को सुबह 08 बजकर 40 मिनट पर होगा। ऐसे में कजरी तीज का व्रत 12 अगस्त को किया जाएगा।

    सूर्योदय: सुबह 05 बजकर 49 मिनट पर

    सूर्यास्त: शाम 07 बजकर 03 मिनट पर

    चंद्रोदय: रात 08 बजकर 59 मिनट पर

    चन्द्रास्त: सुबह 08 बजकर 38 मिनट पर

    ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 23 मिनट से 05 बजकर 06 मिनट तक

    विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 38 मिनट से 03 बजकर 31 मिनट तक

    गोधूलि मुहूर्त: शाम 07 बजकर 03 मिनट से 07 बजकर 25 मिनट तक

    निशिता मुहूर्त:  रात 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक

    कजरी तीज के दिन इन बातों का रखें ध्यान

    इस व्रत को बेहद कठिन माना जाता है, क्योंकि व्रत को निर्जला किया जाता है। शाम को

    पूजा-अर्चना कर चंद्र देव को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। व्रत के दौरान किसी से वाद-विवाद न करें। काले रंग का वस्त्र धारण न करें। घर की साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।