Hariyali Amavasya 2025: हरियाली अमावस्या कब है? यहां जानें शुभ योग और महत्व
सावन (Sawan Start Date 2025) का महीना देवों के देव महादेव को प्रिय है। इस महीने में रोजाना महादेव की पूजा की जाती है। वहीं सोमवार के दिन व्रत रखा जाता है। इसे सावन सोमवारी भी कहा जाता है। इसके अगले दिन मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। इस साल सावन महीने की शुरुआत 11 जुलाई से हो रही है। वहीं समापन 09 अगस्त को होगा।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में हरियाली अमावस्या का खास महत्व है। इस शुभ अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान-ध्यान करते हैं। इसके बाद देवों के देव महादेव का गंगाजल से जलाभिषेक करते हैं। साथ ही भक्ति भाव से भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करते हैं। हरियाली अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान भी किया जाता है।
गरुड़ पुराण में वर्णित है कि अमावस्या तिथि पर पितरों का तर्पण करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं, व्यक्ति को पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। उनकी कृपा से साधक के सुख और सौभाग्य में अपार वृद्धि होती है। आइए, हरियाली अमावस्या की सही डेट, शुभ मुहूर्त एवं योग जानते हैं।
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हरियाली अमावस्या शुभ मुहूर्त (Hariyali amavasya 2025 Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, 24 जुलाई को देर रात 02 बजकर 28 मिनट से हरियाली अमावस्या तिथि की शुरुआत होगी। वहीं, अगले दिन यानी 25 जुलाई को देर रात 12 बजकर 40 मिनट पर अमावस्या तिथि समाप्त होगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष प्रारंभ होगा। सनातन धर्म में सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है। इसके लिए 24 जुलाई को हरियाली अमावस्या मनाई जाएगी।
शिववास योग
ज्योतिषियों की मानें तो हरियाली अमावस्या पर दुर्लभ शिववास योग का संयोग है। इस योग का निर्माण सुबह से हो रहा है। वहीं, शिववास योग देर रात 12 बजकर 40 मिनट तक है। इस दौरान भगवान शिव कैलाश पर जगत जननी देवी मां गौरी के साथ रहेंगे। इस समय में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होगी। साथ ही सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है।
शुभ योग (Hariyali amavasya 2025 Shubh Yoga)
हरियाली अमावस्या पर कई मंगलकारी शुभ योग बन रहे हैं। इनमें रवि पुष्य योग शाम 04 बजकर 43 मिनट से लेकर 25 जुलाई को सुबह 05 बजकर 39 मिनट तक है। सर्वार्थ सिद्धि योग और शिववास योग भी दिन भर है। साथ ही हर्षण योग सुबह 09 बजकर 51 मिनट तक है। वही, अमृत सिद्धि योग शाम 04 बजकर 43 मिनट से लेकर 25 जुलाई को सुबह 05 बजकर 39 मिनट तक है। वहीं, पुनर्वसु नक्षत्र शाम 04 बजकर 43 मिनट तक है। इसके बाद पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इन योग में देवों के देव महादेव की पूजा करने से साधक को पृथ्वी लोक पर स्वर्ग समान सुखों की प्राप्ति होगी।
पंचांग
- सूर्योदय - सुबह 05 बजकर 38 मिनट पर
- सूर्यास्त - शाम 07 बजकर 17 मिनट पर
- चंद्रास्त- शाम 07 बजकर 16 मिनट पर
- ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 15 मिनट से 04 बजकर 57 मिनट तक
- विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 44 मिनट से 03 बजकर 39 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त - शाम 07 बजकर 17 मिनट से 07 बजकर 38 मिनट तक
- निशिता मुहूर्त - रात्रि 12 बजकर 07 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक
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