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    God Ram Kundali: इस एक ग्रह की वजह से भगवान श्रीराम को जीवन भर करना पड़ा था संघर्ष!

    By Pravin KumarEdited By: Pravin Kumar
    Updated: Thu, 18 Jan 2024 01:51 PM (IST)

    God Ram Kundali ज्योतिषियों की मानें तो नवग्रहों को दो भागों में बांटा गया है। एक शुभ ग्रह की श्रेणी है। वहीं दूसरा अशुभ ग्रह की श्रेणी है। कुंडली में शुभ ग्रह के बली होने पर जातक को जीवन में सभी प्रकार के सुखों की प्राप्त होती है। वहीं अशुभ ग्रहों के प्रभाव के चलते जातक को जीवन पर्यंत दुखों का सामना करना पड़ता है।

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    God Ram Kundali: इस एक ग्रह की वजह से भगवान श्रीराम को जीवन भर करना पड़ा था संघर्ष!

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। God Ram Kundali: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम आदर्श और समर्पण की प्रतिमूर्ति हैं। उन्हें अपने जीवनकाल में कई त्रासदियों से गुजरना पड़ा। इनमें 14 वर्ष वनवास, मातृ और पितृ वियोग, माता सीता का हरण, इच्छा विरुद्ध दशानन रावण से युद्ध, पत्नी और पुत्र वियोग और पुत्रों से युद्ध आदि प्रमुख हैं। इसके बावजूद उन्होंने धर्म पथ का साथ नहीं छोड़ा और न ही कभी क्रोधित हुए। तत्कालीन समय में जब उनका एकाधिकार था। उस समय उन्होंने पिता के वचनों का पालन कर वनवास को स्वीकार्य किया। इसके चलते उन्हें मातृ और पितृ वियोग से गुजरना पड़ा। उनका जीवन बेहद संघर्षमय रहा। लेकिन क्या आपको पता है कि भगवान श्रीराम को क्यों जीवन पर्यंत तक संघर्ष का सामना करना पड़ा ? आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-

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    भगवान श्रीराम की जन्म कुंडली

    ज्योतिषियों की मानें तो नवग्रहों को दो भागों में बांटा गया है। एक शुभ ग्रह की श्रेणी है। वहीं, दूसरी अशुभ ग्रह की श्रेणी है। कुंडली में शुभ ग्रहों के बली होने पर जातक को जीवन में सभी प्रकार के सुखों की प्राप्त होती है। वहीं, अशुभ ग्रहों के प्रभाव के चलते जातक को जीवन पर्यंत दुखों का सामना करना पड़ता है। आसान शब्दों में कहें तो व्यक्ति को जीवन भर संघर्ष का सामना करना पड़ता है। शनि, मंगल, राहु और केतु अशुभ ग्रह हैं। वहीं, बुध, गुरु, शुक्र, रवि और चंद्र शुभ ग्रह हैं।

    भगवान श्रीराम की जन्म कुंडली में शनि देव मातृ भाव में बैठे हैं। वहीं, पितृ भाव के स्वामी शनि देव हैं। हालांकि, इस भाव में सूर्य देव विराजमान हैं। सूर्य और शनि देव के संबंध मधुर नहीं है। इन दोनों भावों में शनि के अधिपत्य रहने के चलते भगवान श्रीराम को मातृ और पितृ वियोग का सामना करना पड़ा। साथ ही जीवन भर संघर्ष का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा, प्रथम से द्वादश भाव में स्थित अन्य ग्रहों का भी विचार किया गया है। इनमें जीवनसाथी के भाव में मंगल की दृष्टि के चलते भगवान श्रीराम राम को पत्नी वियोग का सामना करना पड़ा था। कई ज्योतिष मानते हैं कि नीच गुरु होने के चलते भगवान श्रीराम को पत्नी वियोग मिला था।

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    डिसक्लेमर: 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'