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गणेश चतुर्थी 2026: सुबह नहीं कर पाए गणपति स्थापना? न हों परेशान, पढ़ें पूजा के अन्य शुभ मुहूर्त और पूरी विधि

Published: Mon, 14 Sep 2026 06:30 AM (GMT+05:30)Updated: Mon, 14 Sep 2026 01:12 PM (GMT+05:30)

वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी। गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापना के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, ...और पढ़ें

गणेश चतुर्थी 2026 ! (Picture Credit- AI Generated)

गणेश चतुर्थी 2026 ! (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी।

  2. मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त 11:02 AM से 1:31 PM तक।

  3. पूजा में मोदक, दूर्वा और 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का प्रयोग करें।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय माना गया है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत गणेश जी की पूजा से करने की परंपरा है। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भक्त घर में गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित करते हैं और पूरे विधि-विधान से उनकी पूजा करते हैं।

वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन गणेश जी की स्थापना के लिए मध्याह्न काल का समय विशेष शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी की तिथि, मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, प्रिय भोग और आरती से जुड़ी पूरी जानकारी।

गणेश चतुर्थी 2026 की तिथि

साल 2026 में गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा।

  • चतुर्थी तिथि शुरू: 14 सितंबर 2026, सुबह 7 बजकर 6 मिनट 
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 सितंबर 2026, सुबह 7 बजकर 44 मिनट 

चतुर्थी तिथि में गणपति जी की पूजा करना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से मध्याह्न काल में गणेश जी की स्थापना और पूजा करने की परंपरा है।

गणेश जी की मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त

14 सितंबर 2026 को गणेश जी की मूर्ति स्थापना और पूजा के लिए शुभ समय सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।

इस मुहूर्त की कुल अवधि लगभग 2 घंटे 29 मिनट है। भक्त अपनी सुविधा के अनुसार इस अवधि में गणेश जी की स्थापना कर सकते हैं।

गणपति स्थापना के अन्य शुभ मुहूर्त-

अगर आप किसी वजह से इस मुहूर्त में गणपति स्थापना न भी कर पाएं तो और भी शुभ मुहूर्त हैं जिसमें गणपति को स्थापित करना शुभ होगा-

  • चर मुहूर्त- दोपहर 1:49 बजे से 3:22 बजे तक। यदि किसी वजह से आप गणपति की स्थापना सुबह के मुहूर्त में नहीं कर पाए हैं, तो दोपहर में इस मुहूर्त के दौरान बप्पा को घर में स्थापित कर सकते हैं।
  • लाभ मुहूर्त- दोपहर 3:22 बजे से शाम 4:55 बजे तक लाभ चौघड़िया का मुहूर्त है जो गणपति स्थापना के लिए बहुत शुभ माना जा रहा है।
  • अमृत मुहूर्त- शाम 4:55 बजे से 6:28
  • गोधूलि मुहूर्त- गणपति स्थापना आप गोधूलि मुहूर्त में भी कर सकते हैं। यह शुभ मुहूर्त- सायं 6:28 से 6:51 तक रहेगा।

कैसे करें गणेश जी की मूर्ति स्थापना?

गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें। जिस स्थान पर गणेश जी को स्थापित करना है, वहां चौकी रखें।

चौकी सजाएं

एक साफ चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। इसके बाद चौकी पर अक्षत यानी चावल रखें और गणेश जी की मूर्ति स्थापित करने की तैयारी करें।

कलश की स्थापना करें

गणेश जी के पास एक तांबे या पीतल का कलश रखें। इसमें जल, गंगाजल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें। कलश के ऊपर आम के पत्ते लगाकर नारियल रखें। इसके बाद गणेश जी की मूर्ति को चौकी पर विराजमान करें।

गणेश जी का आह्वान करें

मूर्ति स्थापित करते समय हाथ में अक्षत और फूल लेकर भगवान गणेश का ध्यान करें। इसके बाद 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करते हुए गणपति बप्पा का आह्वान करें। यदि घर में विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा की परंपरा है, तो किसी जानकार पंडित की सहायता से यह प्रक्रिया कर सकते हैं।

गणेश जी को क्या-क्या अर्पित करें?

  • गणेश जी की पूजा में कई चीजों का विशेष महत्व बताया गया है। पूजा के दौरान उन्हें रोली, चंदन, अक्षत, लाल फूल और शमी पत्र अर्पित करें।
  • भगवान गणेश को दूर्वा घास विशेष प्रिय मानी जाती है। इसलिए उन्हें 21 दूर्वा अर्पित करने की परंपरा है। दूर्वा अर्पित करते समय गणेश जी का ध्यान करें और अपनी मनोकामना कहें।
  • इसके बाद धूप और शुद्ध घी का दीपक जलाएं। श्रद्धा के अनुसार गणेश जी की पूजा करें।

गणेश जी को लगाएं प्रिय भोग

  • भगवान गणेश को मोदक और लड्डू प्रिय माने जाते हैं। गणेश चतुर्थी के दिन उन्हें 21 मोदक या लड्डू का भोग लगाया जा सकता है।
  • इसके साथ केला, नारियल और अन्य फल भी अर्पित करें। घर पर बने सात्विक पकवानों का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है।
  • भोग लगाने के बाद कुछ समय के लिए उसे भगवान को अर्पित रहने दें। इसके बाद परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटें।

पूजा के बाद करें मंत्र जाप 

गणेश जी की पूजा पूरी करने के बाद 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं। इसके बाद गणेश चालीसा या गणेश जी से जुड़े अन्य स्तोत्र का पाठ करें।

अंत में शुद्ध घी के दीपक से गणपति बप्पा की आरती करें। आरती के दौरान परिवार के सभी सदस्य शामिल हो सकते हैं।

आरती पूरी होने के बाद गणेश जी से घर की सुख-शांति, समृद्धि और सभी विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करें। इसके बाद परिवार के सदस्यों को प्रसाद वितरित करें और श्रद्धा से गणपति बप्पा मोरया का जयकारा लगाएं।

गणेश जी की आरती 

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।

माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती (माता पार्वती के मंत्र), पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।

लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।

कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

अत: इस गणेश चतुर्थी पर विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है

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