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14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का दुर्लभ संयोग, कैसे रखें दोनों व्रत और कब करें पारण ?

Published: Sat, 12 Sep 2026 06:30 PM (IST)

14 सितंबर 2026 को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे यह दिन धार्मिक दृष्टि ...और पढ़ें

हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन मनाए जाएंगे। (Picture Credit- AI Generated)दिन मनाए

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। इस साल 14 सितंबर 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। इस दिन हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का संयोग बन रहा है। एक तरफ महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी, वहीं दूसरी तरफ गणपति बप्पा की पूजा करके सुख-समृद्धि और विघ्नों से मुक्ति की प्रार्थना की जाएगी।

दोनों व्रत एक ही दिन पड़ने के कारण कई लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या दोनों व्रत अलग-अलग रखने होंगे? पूजा किस समय करनी चाहिए और व्रत का पारण कब किया जाएगा? आइए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब।

14 सितंबर को कब तक रहेगी तृतीया तिथि?

पंचांग के अनुसार, 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक तृतीया तिथि रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी। इसलिए हरतालिका तीज की मुख्य पूजा सुबह तृतीया तिथि में ही करना शुभ रहेगा। ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तीज की पूजा कर सकती हैं।

क्या दोनों व्रत अलग-अलग रखने होंगे?

हरतालिका तीज का व्रत बहुत कठिन माना जाता है। कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं यानी पूरे दिन न तो भोजन करती हैं और न ही पानी ग्रहण करती हैं। यदि आप हरतालिका तीज का निर्जला व्रत रख रही हैं, तो गणेश चतुर्थी का व्रत भी उसी में शामिल माना जाएगा। सुबह उठकर मंदिर में आप दोनों व्रत एक साथ रखने का संकल्‍प कर सकती हैं।

सुबह करें हरतालिका तीज की पूजा

14 सितंबर को हरतालिका तीज की पूजा का शुभ समय सुबह 6 बजकर 5 मिनट से 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। इस दौरान स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को साफ करें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की रेत या मिट्टी से प्रतिमा बनाकर उनकी पूजा करें।

माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें और भगवान शिव को बेलपत्र, फूल, फल आदि चढ़ाएं। इसके बाद हरतालिका तीज की कथा सुनें या पढ़ें और भगवान शिव-पार्वती से सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना करें।

दोपहर में करें गणेश जी की स्थापना

हरतालिका तीज की सुबह की पूजा पूरी करने के बाद दोपहर में गणेश चतुर्थी की पूजा और गणपति स्थापना की तैयारी करें। 14 सितंबर को गणेश स्थापना के लिए सुबह 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। इस दौरान घर में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। गणपति बप्पा को दूर्वा, लाल फूल, मोदक और फल अर्पित करें। इसके बाद गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करें और गणेश चतुर्थी की कथा पढ़ें या सुनें।

शाम को फिर करें शिव-पार्वती की पूजा

हरतालिका तीज की पूजा केवल सुबह तक सीमित नहीं होती। शाम के समय भी भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, आरती और व्रत कथा सुनी जाती है। 14 सितंबर को शाम 6 बजकर 28 मिनट से 7 बजकर 37 मिनट तक पूजा का शुभ समय बताया गया है। इस दौरान शिव-पार्वती की आरती करें। हरतालिका तीज के दिन रात में जागरण करने की परंपरा है।

हरतालिका तीज का व्रत कब खोलें?

इस दिन सबसे महत्वपूर्ण बात व्रत का पारण तृतीया तिथि के समाप्त होते ही नहीं किया जाता है। हरतालिका तीज के व्रत का पारण दूसरे दिन 15 सितंबर को सुर्योदय होने के बाद ही किया जाएगा। इसी के साथ गणेश चतुर्थी के व्रत का पारण भी हो जाता है।

अत: 14 सितंबर का दिन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक रूप से बेहद खास रहेगा। इस दिन दो बड़े त्‍योहार एक साथ पड़ रहे हैं।

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