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गणेश चतुर्थी 2026: भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर इस शुभ मुहूर्त में करें बप्पा की स्थापना; पढ़ें पूरी पूजा विधि और सामग्री

Published: Sun, 06 Sep 2026 07:00 AM (IST)Updated: Sat, 12 Sep 2026 09:37 AM (IST)

भगवान गणेश की पूजा का महापर्व गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को है। जानिए गणेश स्थापना मुहूर्त, पूजा विधि, सामग्री और विसर्जन कैलेंडर की संपूर्ण जानकारी के बारे में।

गणेश चतुर्थी 2026 तिथि और समय

गणेश चतुर्थी 2026 तिथि और समय

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान गणेश सभी देवी-देवताओं में प्रथम पूजनीय हैं। विवाह की अग्नि प्रज्वलित होने से पहले, नई दुकान खुलने से पहले या बहीखाते पर पहला पन्ना लिखे जाने से पहले भगवान गणेश का नाम लिया जाता है। वे विघ्नहर्ता हैं, जो बाधाओं को दूर करने वाले है। भाद्रपद माह के दस दिनों तक वे सिर्फ हमारी प्रार्थनाएं ही पूरी नहीं करते बल्कि वे धरती पर निवास करते हैं।

इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर 2026, सोमवार के दिन है। जो महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात समेत देशभर के अलग-अलग हिस्सों में लाखों परिवारों के लिए भक्ति करने का सुनहरा मौका होता है। आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी 2026 से जुड़ी सटीक तिथि, मूर्ति स्थापना मुहूर्त, पूजा विधि चरण, सामग्री, विसर्जन कैलेंडर समेत संपूर्ण जानकारी।

गणेश चतुर्थी 2026 तिथि और स्थापना मुहूर्त

हिंदू पंचांग के मुताबिक, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को ही गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। अधिकांश हिंदू व्रत सूर्योदय के समय ही किए जाते हैं लेकिन गणेश स्थापना दोपहर के समय की जाती है।

ऐसा इसलिए क्योंकि माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म दोपहर में ही हुआ था। दोपहर के समय मूर्ति स्थापित करना काफी शुभ माना जाता है।

गणेश चतुर्थी- सोमवार, 14 सितंबर 2026

चतुर्थी तिथि का प्रारंभ- सुबह 7 बजकर 6 मिनट

चतुर्थी तिथि समाप्त- सुबह 7 बजकर 44 मिनट, 15 सितंबर 2026

स्थापना मुहूर्त नई दिल्ली- सुबह 11 बजकर 2 मिनट से 1 बजकर 31 मिनट तक

स्थापना मुहूर्त मुंबई- सुबह 11 बजकर 20 मिनट दोपहर 1 बजकर 48 मिनट तक

स्थापना मुहूर्त पुणे- सुबह 11 बजकर 16 मिनट से दोपहर 1 बजकर 44 मिनट तक

स्थापना मुहूर्त कोलकाता- सुबह 10 बजकर 18 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक

मुख्य विसर्जन की तिथि- 25 सितंबर 2026, शुक्रवारO

गणेश चतुर्थी 2026 तिथि और समय (1)

गणेश स्थापना और पूजा विधि

सुबह जल्दी स्नान करने के बाद नए कपड़े या साफ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को अच्छी तरह से साफ करें और उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके एक लकड़ी की चौकी स्थापित करें। आसन पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। स्वास्तिक बनाएं और मूर्ति के केंद्र में अक्षत रखें।

इसके बाद दाहिने हाथ में जल, अक्षत और एक फूल लें और अपने संकल्प बताएं। अंत में जल को विसर्जित कर दें।

दोपहर को शुभ मुहूर्त में मूर्ति को अक्षत पर स्थापित करें। उस पर गंगा जल छिड़क कर ऊं गम गणपतये नमः" मंत्र का जाप करें। इसके बाद मूर्ति के बगल में पानी से भरा तांबे कलश, एक सिक्के, सुपारी और आम के पत्ते, नारियल रखें।

चंदन और रोली का तिलक लगाएं। अक्षत, मौली धागा, फूल, 21 पत्तियों वाली दूर्वा घास और यदि संभव हो तो लाल गुड़हल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद घी का दीपक और धूप जलाएं।

इसके बाद पंचमेवा, मिश्री और फल के साथ 21 मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। गणेश चतुर्थी कथा और स्यमंतक मणि की कथा पढ़ें। इसके बाद गणेश जी की आरती करें।

जितने दिन भगवान आपके घर में विराजमान रहें, उतने दिन दो बार सुबह और शाम आरती करें। वे अतिथि हैं और उनके साथ अतिथि जैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए।

गणेश चतुर्थी 2026 सामग्री

  • गणेश मूर्ति
  • गंगाजल
  • तांबे का कलश
  • रोली, कुमकुम और चंदन
  • अक्षत
  • मौली धागा
  • देसी घी और भीमसेनी कपूर
  • सुपारी और हल्दी की गांठ
  • पंचमेवा और मिश्री
  • आरती की थाली

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।