महाष्टमी पर 108 दीपक जलाने की परंपरा क्यों है खास? ज्योतिषी ने बताया इसका रहस्य
महाष्टमी पर 108 दीपक जलाने की परंपरा का विशेष महत्व है, जिसे आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता ...और पढ़ें
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दुर्गा अष्टमी पर दीपदान क्यों है खास? (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर दुर्गा अष्टमी मनाई जाती है, जिसे महाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मां महागौरी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही कन्या पूजन भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन कामों को करने से शारदीय नवरात्र व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और मां दुर्गा की मां महागौरी की कृपा प्राप्त होती है।
इसके अलावा इस दिन 108 दीपक जलाना सबसे चमत्कारी और फलदायी उपायों में से एक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दुर्गा अष्टमी के दिन 108 दीपक जलाने से देवी की कृपा से साधक की सभी मुरादें पूरी होती हैं और जीवन में सौभाग्य के द्वार खुलते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर दुर्गा अष्टमी के दिन 108 दीपक क्यों जलाएं जाते हैं और इसके पीछे की वजह क्या है। आइए इस आर्टिकल में आपको एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी बृज गौतम के अनुसार बताते हैं इसके धार्मिक महत्व के बारे में।
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी बृज गौतम के अनुसार, शारदीय नवरात्र की दुर्गा अष्टमी पर 108 दीपक प्रज्वलित करना मां दुर्गा की पूजा-अर्चना में विशेष महत्व रखता है। यह कार्य केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है।
108 दीपक जलाने का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
पूर्णता और पवित्रता का प्रतीक: भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में 108 की संख्या को पूर्णता, पवित्रता और ईश्वरीय चेतना का प्रतीक माना जाता है।
अंधकार और नकारात्मकता का नाश: दीपक का प्रकाश अज्ञान, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक अंधकार को दूर करने का कार्य करता है। दुर्गा अष्टमी पर 108 दीपक प्रज्वलित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और पवित्र वातावरण का विस्तार होता है।
विशेष साधना का माध्यम: मां दुर्गा के चरणों में 108 दीपक अर्पित करना देवी की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक सात्विक माध्यम माना गया है।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण
ज्योतिष के अनुसार, अष्टमी तिथि पर दीपदान करने से ग्रहजनित नकारात्मक प्रभावों में कमी आती है और मन में स्थिरता तथा एकाग्रता बढ़ती है। इसे पूर्ण आस्था और नियमपूर्वक करने से शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
- पूजा के दौरान भी भूलकर भी टूटे हुए दीपक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। पूजा के लिए हमेशा साफ और साबुत दीपक लेना चाहिए।
- इसके अलावा एक दीपक से दूसरा दीपक नहीं जलाना चाहिए।
- एक बात का विशेष ध्यान रखें कि पूजा के दौरान कोई भी दीपक बीच में बुझना नहीं चाहिए।
- दीपक को शांत मन से जलाना चाहिए।
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