दीवाली स्पेशल: महालक्ष्मी को पंचामृत स्नान कराना क्यों माना जाता है शुभ?
दीवाली पर महालक्ष्मी को पंचामृत स्नान कराना क्यों माना जाता है शुभ, जानें दूध दही घी शहद और गंगाजल के ...और पढ़ें

दीवाली पर महालक्ष्मी की पूजा। (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
पंचामृत दूध, दही, घी, शहद, शक्कर से बनता है।
दीवाली पर लक्ष्मी को पंचामृत स्नान कराना शुभ माना जाता है।
पंचामृत अभिषेक से घर में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दीवाली का त्योहार मां लक्ष्मी के स्वागत और उनकी विशेष पूजा-अर्चना का पर्व है। इस दिन भक्त माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इन्हीं में से एक है महालक्ष्मी को पंचामृत स्नान कराना। धार्मिक मान्यता है कि दीवाली पर माता का पंचामृत से अभिषेक करने से घर में सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति आती है। आइए जानते हैं पंचामृत के पांच तत्वों का महत्व और इसकी पूजा विधि।
पंचामृत क्या है और इसके पांच तत्वों का महत्व?
पंचामृत का अर्थ है पांच अमृत। इसे दूध, दही, घी, शहद और शक्कर या मिश्री मिलाकर तैयार किया जाता है। कुछ पूजा परंपराओं में इसमें गंगाजल भी मिलाया जाता है। इन सभी चीजों का अपना अलग धार्मिक महत्व है।
- दूध को शुद्धता, पवित्रता और शांति का प्रतीक माना जाता है। माता को दूध अर्पित करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहने की कामना की जाती है।
- दही समृद्धि, स्थिरता और आरोग्य का प्रतीक है। इसे अर्पित करने से जीवन में स्थिरता आने की मान्यता है।
- घी को धन, वैभव और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। यह परिवार में प्रेम और मधुर संबंधों का प्रतीक भी है।
- शहद मधुर वाणी, प्रेम और सफलता का प्रतीक माना जाता है। इसे चढ़ाने से जीवन में मिठास आने की कामना की जाती है।
- मिश्री खुशियों और मधुरता का प्रतीक है, जबकि गंगाजल पवित्रता और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।
दीवाली पर पंचामृत स्नान क्यों है खास?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसलिए दिवाली पर उनकी विशेष पूजा और अभिषेक करने की परंपरा है। भक्त पंचामृत से माता का स्नान कराकर उनसे धन, वैभव और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं।
ऐसा भी माना जाता है कि दिवाली की रात शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से लक्ष्मी पूजन करने से घर में माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। पंचामृत स्नान इसी श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है।
महालक्ष्मी को पंचामृत स्नान कराने की सही विधि
सबसे पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। माता लक्ष्मी की प्रतिमा को स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और मिश्री मिलाकर पंचामृत तैयार करें।
अब श्रद्धापूर्वक माता को पंचामृत अर्पित करें। इसके बाद स्वच्छ जल या गंगाजल से प्रतिमा को स्नान कराएं। फिर साफ कपड़े से प्रतिमा को पोंछकर वस्त्र, चंदन, फूल, अक्षत और माला अर्पित करें। अंत में धूप-दीप जलाकर लक्ष्मी मंत्रों का जाप करें और आरती करें। ध्यान रखें कि प्रतिमा ऐसी हो जिसका अभिषेक करना उचित हो।
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