धन की देवी को क्यों पड़ी विघ्नहर्ता की जरूरत? यहां समझें लक्ष्मी-गणेश के 'दत्तक पुत्र' का अनसुना रहस्य
दीवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा के पीछे एक गहरा रहस्य है। गणेश पुराण के अनुसार, माता लक्ष्मी ने भगवान गणेश ...और पढ़ें

मां लक्ष्मी को क्यों हुआ था अपनी शक्तियों पर घमंड? (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में दीवाली के पर्व को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवसर पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लक्ष्मी और गणेश की साधना करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और धन लाभ के योग बनते हैं।
माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा अत्यंत फलदायी और कल्याणकारी मानी जाती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मां लक्ष्मी का गणपति बप्पा से क्या संबंध है? गणेश पुराण में बताया गया है कि मां लक्ष्मी ने भगवान गणेश को अपना दत्तक पुत्र बनाया था। अब ऐसे में सवाल उठता है कि धन की देवी मां लक्ष्मी ने गणेश जी को दत्तक पुत्र क्यों बनाया? आइए इस लेख में हम आपको इससे जुड़े रहस्य के बारे में विस्तार से बताते हैं।
क्यों बनाना पड़ा गणेश जी को दत्तक पुत्र?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार बैकुंठ धाम में जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के बीच चर्चा हो रही थी। चर्चा के दौरान देवी ने भगवान विष्णु से कहा, "मैं अपने भक्तों को धन-धान्य, ऐश्वर्य और सौभाग्य प्रदान करती हूं। मेरी कृपा से ही भक्तों को जीवन में सभी तरह के सुखों की प्राप्ति होती है। इसलिए मेरी पूजा ही सर्वश्रेष्ठ है।" भगवान विष्णु उनका यह अहंकार समझ गए। प्रभु ने देवी के अहंकार को दूर करने का फैसला लिया और कहा, "देवी, आप श्रेष्ठ जरूर हैं, लेकिन आपका नारीत्व अभी भी अधूरा है।"
मां लक्ष्मी ने मां पार्वती को बताई अपनी पीड़ा
भगवान विष्णु ने आगे कहा, "जब तक किसी स्त्री को मातृत्व का सुख नहीं मिलता, तब तक उसे पूर्ण नहीं माना जाता।" यह बात सुनकर मां लक्ष्मी अत्यंत दुखी हुईं। इसके बाद वे माता पार्वती के पास पहुंचीं और उन्हें अपनी यह पीड़ा बताई। तब माता पार्वती ने अपने पुत्र गणेश को उन्हें दत्तक पुत्र के रूप में सौंप दिया। भगवान गणेश को पुत्र के रूप में पाकर मां लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न हुईं।
उन्होंने उसी समय यह वरदान दिया कि किसी भी भक्त को धन, सफलता और ऐश्वर्य का पूर्ण फल तभी मिलेगा, जब वह लक्ष्मी और गणेश की एक साथ आराधना करेगा। यही वजह है कि दीवाली के दिन मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की उनके दत्तक पुत्र के रूप में पूजा-अर्चना करने का विधान है।
मां लक्ष्मी के वाहन
सनातन परंपरा में मां लक्ष्मी के साथ उल्लू और मोर, दोनों का संबंध बहुत गहरा है। उल्लू अंधेरे में भी देख सकता है, जिससे हमें हमेशा चौकन्ना रहने, आगे की सोचने और समझदारी से काम लेने की सीख मिलती है। वहीं दूसरी तरफ, मोर सुंदरता और पवित्रता की निशानी है। यह बुराई को मिटाने और सादगी के साथ जीवन में संपन्नता लाने का प्रतीक है।
दत्तक पुत्र से मिलता है यह संदेश
मां लक्ष्मी द्वारा गणेश जी को दत्तक पुत्र बनाने से यह संदेश मिलता है कि व्यक्ति को जीवन में दिखावे या अहंकार में आकर अपना विवेक और समझदारी नहीं खोनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश की साधना करने से सही फैसले लेने की बुद्धि मिलती है और शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।
लक्ष्मी-विनायक मंत्रॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥
मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान लक्ष्मी-विनायक मंत्र का जप जरूर करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंत्र का जप करने से धन लंबे समय तक टिकता है और बचत में वृद्धि होती है। साथ ही नौकरी, करियर या व्यापार में आ रही अड़चनों को भगवान गणेश दूर करते हैं।
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