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सिर्फ लक्ष्मी पूजा ही नहीं, दिवाली पर चोपड़ पूजन भी है बेहद खास; पढ़ें गुजराती नववर्ष और बही-खातों से जुड़ी अनोखी परंपरा

Published: Mon, 02 Nov 2026 05:30 PM (IST)

दीवाली के अवसर पर गुजरात में चोपड़ पूजन की परंपरा निभाई जाती है, जिसमें नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के ...और पढ़ें

दिवाली पर चौपड़ पूजन का महत्व (Picture Credits- AI Images)

दिवाली पर चौपड़ पूजन का महत्व (Picture Credits- AI Images)

HighLights

  1. दीवाली पर गुजरात में होती है चोपड़ पूजन परंपरा।

  2. नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का प्रतीक यह पूजा।

  3. व्यापार में ईमानदारी और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। फेस्टिव सीजन की शुरुआत हो चुकी है। नवरात्र और दशहरा बीतने के बाद अब बाजारों में दीवाली, धनतेरस और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों को लेकर रौनक देखने को मिल रही है। इस साल दीवाली का उत्सव 8 नवंबर 2026, रविवार के दिन मनाया जाना है। वहीं दीवाली से दो दिन पहले धनतेरस का त्योहार आता है और दीवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। दीवाली के बाद गुजराती नववर्ष मनाते हैं।

चोपड़ पूजन एक गुजराती परंपरा है, जो दीवाली के दौरान आती है। इस दौरान व्यापारी और परिवार अपनी नई अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं। गुजराती में 'चोपड़' शब्द का असल अर्थ अकाउंट बुक या लेजर होता है और यह पूजा गुजराती कैलेंडर के मुताबिक नए फाइनेंशियल साल की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। कई गुजराती परिवार और व्यापारियों के लिए दीवाली के मौके पर चोपड़ पूजन उतना ही जरूरी है जितना कि खुद त्योहार हो।

दीवाली के दिन चोपड़ पूजन क्या है?

दीवाली के मौके पर गुजरात में चोपड़ पूजा की परंपरा निभाई जाती है। आमतौर पर यह पूजा दीवाली की सुबह या दीवाली के अगले दिन यानी गोवर्धन पूजा पर की जाती है। गुजराती लोगों के लिए यह समय इसलिए भी खास है क्योंकि दीवाली के अगले दिन को 'बेस्टु वरस' यानी गुजरातियों का नया साल भी कहा जाता है।

चोपड़ पूजन अक्सर इस समय न सिर्फ नई किताबों की शुरुआत करने के लिए किया जाता है, बल्कि व्यापार और रोजी-रोटी के लिए एक नए दौर की भी शुरुआत की जाती है।

चोपड़ पूजन का महत्व

गुजराती कल्चर में नई अकाउंट बुक्स खोलना सिर्फ प्रशासनिक काम ही नहीं है, इसे अध्यात्म से जोड़कर भी देखा जाता है। डिजिटल दौर से पहले व्यापारी हाथ से लिखे हुए चौपड़ (डायरी) रखते थे और उन रिकॉर्ड्स की गुणवत्ता से समाज में उनकी हैसियत तय होती थी।

एक बेहतर ढंग से रख-रखाव की गई अकाउंट बुक गर्व और भरोसे का कारण होता था। इन्हें इस्तेमाल करने से पहले पूजा करके परिवार यह सुनिश्चित करते थे कि आने वाला साल ईमानदारी से काम करने, सही दाम और सही व्यापारिक गतिविधियों से गुजरेगा।

चोपड़ पूजन कैसे होती है?

चोपड़ पूजन में नए खाता बुक, खाता रजिस्टर या लेजर इक्ट्टा करना शामिल है। जिन्हें आने वाले समय इस्तेमाल किया जाएगा। इन्हें दुकान या घर में एक छोटी वेदी या टेबल के ऊपर रखा जाता है। जिसे सुंदर-सुंदर फूलों, धूप और दीयों से सजाया जाता है।

कई परिवारों में चोपड़ पूजा के दौरान केंद्र में मां लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा रखी जाती है। जिसे लेकर माना जाता है कि इससे धन और व्यापार में वृद्धि होगी। चोपड़ पूजन छोटी लेकिन दिल से की जाती है। पूजा होने के बाद बही खाता इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाती है।

यह समय इसलिए भी बेहद खास माना जाता है क्योंकि दीवाली गुजराती कैलेंडर में नए साल की शुरुआत होती है। यह तारीख सदियों से चली आ रही है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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